झारखंड के देवघर में सोमवार सुबह हुए हृदयविदारक हादसे से जहां पूरे देश में शोक की लहर है, वहीं हादसे के पीछे के कारणों की तलाश भी शुरू हो गई है। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो कांवड़ियों की भगदड़ का कारण पुलिस द्वारा किया लाठीचार्ज है।
जिसके बाद लोगों में आपाधापी मच गई और 11 शिवभक्तों को अपनी जान गंवानी पड़ी। वहीं घटना के बाद रघुवर दास सरकार पर उंगलियां उठने का दौर शुरू हो गया है। खुद उनकी पार्टी के सांसद और देवघर से जुड़े गुड्डा के सांसद निशिकांत दूबे ने घटना के लिए सीधे-सीधे राज्य सरकार को दोषी ठहरा दिया है।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार पहले से ही उचित इंतजाम रखती तो बेगुनाह लोगों को इस तरह अपनी जान से हाथ न धोना पड़ता। वहीं मुख्यमंत्री रघुवर दास ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गृहसचिव एनएन पांडे की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय कमेटी बना दी है जो हादसे के कारणों पर जांच करके जल्द अपनी रिपोर्ट देगी।
वहीं मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिजनों को दो लाख और घायलो को 50 हजार सहायता देने की घोषणा की है।
सावन के हर सोमवार जुटती है लाखों की भीड़
बता दें कि शिव के 12 ज्योर्तिलिंग में से एक देवघर की शिवभक्तों में जबरदस्त मान्यता है। हर साल सावन के महीने में यहां लाखों लोग शिवलिंग पर जल चढ़ाने के लिए आते हैं।
खासकर सावन के सोमवार को यहां लाखों की संख्या में शिवभक्त जुटते हैं। यही कारण था कि सोमवार होने के कारण आज सुबह से ही कावंडियों की भीड़ यहां जुटना शुरू हो गई थी। पुलिस की मानें तो सुबह पांच बजे तक कावंडियों का आंकड़ा डेढ़ लाख के करीब पहुंच चुका था।
मंदिर से काफी पहले बेलबगान इलाके में कांवडियों की दस किलोमीटर लंबी लाइन लगी हुई थी। इसी बीच अचानक भगदड़ मच गई और 11 शिवभक्तों की मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो भगदड़ का कारण पुलिस द्वारा किया लाठीचार्ज था जिसके कारण लोग दहशत में इधर उधर भागने लगे।
हालांकि झारखंड पुलिस के डीआईजी डीबी शर्मा के अनुसार भगदड़ लाठीचार्ज के कारण नहीं कांवडियों की असहनशीलता के कारण हुई। डीआईजी ने कहा कि कई दिनों की यात्रा के कारण कांवड़िए थके हारे रहते हैं और उन्हें घर जाने की जल्दी रहती है।
इसी आपाधापी में भगदड़ मची और हादसा हो गया। हालांकि एक पहलू ये भी है कि भीड़ को देखते हुए पुलिस और प्रशासन के इंतजाम नाकाफी थी। पुलिस भी इस बात को मानती है, कि मंदिर में 90 हजार के करीब शिवभक्तों के आने का अंदाजा था लेकिन भीड़ डेढ़ लाख के करीब पहुंच गई।
बता दें कि देवघर में साल 2013 में भी ऐसा ही हादसा हुआ था जिसमें 9 लोगों की मौत हो गई थी।
भाजपा सांसद ने प्रदेश सरकार पर साधा निशाना
वहीं हादसे के बाद प्रदेश सरकार और प्रशासन पर उंगलियां उठनी शुरू हो गई हैं। पहला निशाना साधा है राज्य में सत्तारूढ़ भाजपा के ही सांसद निशिकांत दूबे ने। देवघर से सटे गुड्डा के सांसद निशिकांत ने हादसे के बाद तुंरत इसकी जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि प्रदेश सरकार की लापरवाही के कारण ये घटना हुई।
उन्होंने कहा कि देवघर की गिनती देश के प्रमुख तीर्थ स्थलों में होती है यहां जुटने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा वैष्णों देवी और तिरुपति बालाजी से भी ज्यादा है। इसलिए यहां इंतजाम भी उसी स्तर के होने चाहिएं।
दूबे ने कहा कि यहां आने वाले भक्तों के लिए साल 2012 में क्यू काम्पलेक्स के निर्माण के लिए पैसा स्वीकृत कराया गया था। जिसमें एक बार में 40 हजार कांवड़ियों के रुकने की व्यवस्था होती है।
साल 2013 में राष्ट्रपति ने उस काम्पलेक्स का उद्घाटन भी कर दिया लेकिन आज तक उसमें एक ईंट नहीं रखी गई, इसी से राज्य सरकार के काम करने का अंदाजा लगाया जा सकता है। सरकार अगर सचेत रहती तो ये हादसा न होता। सांसद ने हादसे के लिए खुद को भी जिम्मेदार ठहराया है।