झारखंड में भोजन के अधिकार कार्यकर्ताओं की रिपोर्ट के मुताबिक गढ़वा में भूख से बुजुर्ग महिला की मौत की मुख्य वजह बैंक की धोखाधड़ी थी। इस महीने के शुरुआत में गढ़वा में 64 वर्षीय विधवा महिला प्रेमणि की भूख से मौत हो गई थी।
भोजन के अधिकार के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं की टीम ने भूख से हुई मौत के पीछ की वजहों की पड़ताल के लिए एक फैक्ट फाइंडिग टीम का गठन किया था। उसी टीम ने यह रिपोर्ट तैयार की है जिसके मुताबिक 2015 में मृतक महिला के आधार कार्ड की जानकारियों के साथ छेड़छाड़ की गई थी।
झारखंड गढ़वा के डांडा ब्लॉक के एक गांव में रहनेवाली प्रेमणि की मौत एक दिसंबर को हो गई थी। जांच में ये पाया गया कि प्रेमणि को मिलनेवाली पेंशन की राशि प्रेमणि के मृतक पति मटर महतो की पहली पत्नी शांति देवी के बैंक खाते में जा रही थी। शांति देवी की मौत 1992 में हो चुकी थी।
8 दिसंबर को की गई यूआईडीएआई की जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए टीम ने बताया कि बैंक ने शांति देवी का बैंक एकाउंट पिछले साल सितंबर में कैसे खोला जबकि उनकी मौत 25 साल पहले हो चुकी थी।
टीम ने कई सवाल किए हैं जिसका जवाब यूआईडीएआई की जांच रिपोर्ट से नहीं मिल पाया है। मसलन, प्रेमणि कुंवर के आधार कार्ड में 23 सितंबर 2015 को नाम बदलकर शांति देवी का नाम दर्ज हो गया, लेकिन प्रेमणि के आधार से जुड़े बैंक खाते में पेंशन की राशि आती रही। दो दशक पहले गुजर चुकी शांति देवी का बैंक खाता कैसे खुल गया।
यूआईडीएआई की जांच टीम के पहुंचने से ठीक एक दिन पहले 7 दिसंबर को शांति देवी के बैंक खाते में पहचान साबित करने की केवाईसी की कार्यवाही पूरी की गई। हालांकि एसबीआई बैंक के पीपराकला ब्रांच के मैनेजर ने भोजन के अधिकार की जांच टीम को वो कागजात नहीं दिखाए जिनके आधार पर शांति देवी के नाम से बैंक खाता खोला गया।
इस घटना से बैंक के कर्मचारियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।