झारखंड में दुष्कर्म की शिकार महिलाओं को अब नौकरी के साथ मुआवजा भी मिलेगा। सीआईडी ने इसके लिए नई पुनर्वास योजना का प्रस्ताव तैयार कर राज्य सरकार को भेजा है।
सरकार की मंजूरी मिली तो इसी साल 15 नवंबर को झारखंड स्थापना दिवस पर यह योजना लागू हो जाएगी। ऐसे मिलेगा मुआवजा पीडि़ता को दो से तीन लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा।
पीडि़ता को घटना के 60 दिनों के भीतर बोर्ड के समक्ष दावा पेश करना होगा। नाबालिग होने पर अभिभावक दावा कर सकेंगे। दावा पेश करने के 15 दिनों के भीतर बोर्ड को लेना होगा निर्णय।
दावा सही मिला तो 15 दिन के अंदर मिलेंगे 20 हजार रुपए। प्रारंभिक जांच में दावा सही मिलने पर डीएसपी स्तर के अधिकारी की रिपोर्ट पर 15 दिन के भीतर फिर 50 हजार रुपए दिए जाएंगे।
जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल होने के बाद 30 हजार रुपए का भुगतान किया जाएगा। पीड़िता द्वारा गवाही देने और अभियोजन पक्ष को प्रमाणित करने पर 50 हजार मिलेंगे।
पीड़िता को इलाज की जरूरत हुई तो दावा करने के तुरंत बाद 50 हजार रुपए दिए जाएंगे। अगर पीड़िता होमगार्ड में नियुक्ति के लिए निर्धारित अर्हता पूरा नहीं करती हो तो डीसी नियम शिथिल कर सकेंगे।
15 नवंबर 2000 से 15 नवंबर 2013 के बीच की घटना में पीड़िता यदि अभियुक्त को सजा दिलाने में सफल तो एकमुश्त 50 हजार रुपए मिलेंगे।
इसके लिए 60 दिनों में बोर्ड के पास दावा करना होगा। राज्य के बाहर हुई घटना में अगर संबंधित राज्य से मुआवजा नहीं मिलता है तो घटना प्रमाणित करने पर मुआवजा मिलेगा।