पूर्व मंत्री कांग्रेस नेता योगेंद्र साव सीओ से बहस करते हुए
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कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री योगेंद्र साव के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ दिए गए बयान के बाद झारखंड की सियासत एक बार फिर गरमा गई है। हजारीबाग के हुरहुरू में 50 डिसमिल खासमहल जमीन पर प्रशासनिक कार्रवाई के बीच साव के सरकार विरोधी तेवर ने कांग्रेस के साथ-साथ सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर भी चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस ने उनके बयान पर फिलहाल कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया देने से परहेज किया है। वहीं, साव की बेटी और पूर्व विधायक अंबा प्रसाद ने मुख्यमंत्री के खिलाफ अपने पिता की व्यक्तिगत टिप्पणी से सार्वजनिक रूप से असहमति जताई है।
हुरहुरू की जमीन पर प्रशासनिक कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद
विवाद की शुरुआत 18 सितंबर को हुई, जब प्रशासनिक टीम जेसीबी के साथ हुरहुरू स्थित जमीन पर कार्रवाई के लिए पहुंची। इस दौरान योगेंद्र साव और अधिकारियों के बीच तीखी बहस हुई। प्रशासन का कहना है कि कैंटोनमेंट मौजा की संबंधित जमीन खासमहल की सरकारी भूमि है और उस पर अवैध कब्जे अथवा निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। दूसरी ओर, साव जमीन पर अपने दावे के समर्थन में दस्तावेज और एग्रीमेंट का हवाला दे रहे हैं।
सरकार और मुख्यमंत्री पर आरोपों से बढ़ी सियासी हलचल
मामले ने राजनीतिक रंग तब और गहरा लिया, जब साव ने सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ तीखे आरोप लगाए। विपक्षी भाजपा को भी गठबंधन सरकार को घेरने का मौका मिल गया। भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने साव के आरोपों को आधार बनाकर कांग्रेस नेतृत्व, विशेषकर राहुल गांधी से सवाल किया है।
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पहले भी कांग्रेस से टकराव में रहे हैं योगेंद्र साव
योगेंद्र साव का सरकार से टकराव नया नहीं है। मार्च 2026 में उन्हें कांग्रेस से तीन वर्ष के लिए निष्कासित किया गया था, जिसे करीब तीन महीने बाद जून में वापस ले लिया गया। अब ताजा विवाद ने कांग्रेस संगठन, साव परिवार और झामुमो-कांग्रेस गठबंधन के बीच संबंधों को लेकर नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है।
अंबा प्रसाद ने पिता के बयान से बनाई दूरी
इस पूरे घटनाक्रम में अंबा प्रसाद का रुख भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। उन्होंने पिता की मुख्यमंत्री पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणी से दूरी बनाकर स्पष्ट किया है कि दोनों के राजनीतिक रुख हर मुद्दे पर एक जैसे नहीं हैं। फिलहाल, हुरहुरू की जमीन का विवाद प्रशासनिक कार्रवाई से आगे बढ़कर राज्य की राजनीति में नया सियासी मुद्दा बन गया है।