झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर का काम तेजी से चल रहा है। मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया के बीच जमशेदपुर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में तीन अफगान नागरिकों के नाम सामने आने से प्रशासनिक महकमे में हलचल मच गई है। निर्वाचन विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं। विभाग के अनुसार एसआईआर के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने की प्रस्तावित तारीख 19 अक्टूबर है।
मतदान केंद्र 286 की सूची में दर्ज मिले तीन नाम
जानकारी के अनुसार, जमशेदपुर ईस्ट विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 286 की मतदाता सूची में तीन अफगान नागरिकों के नाम दर्ज पाए गए। इनमें असील खान, मोहम्मद असलम और मोहम्मद इब्राहीम शामिल हैं। तीनों के नाम क्रमश: 30, 31 और 33 नंबर पर दर्ज बताए जा रहे हैं। बताया गया है कि तीनों जमशेदपुर में किराये के मकान में रहते थे। एसआईआर की प्रक्रिया के दौरान उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम जुड़वा लिए थे।
पासपोर्ट जांच में अफगान नागरिक होने की जानकारी
जांच के दौरान निर्वाचन विभाग को तीनों के दस्तावेजों से जुड़ी जानकारी मिली। पासपोर्ट की जांच में तीनों के अफगानिस्तान के नागरिक होने की बात सामने आने की जानकारी दी गई है। संबंधित दस्तावेजों की भारतीय दूतावास के स्तर पर भी जांच कराए जाने की बात कही गई है। आरोप है कि एसआईआर के दौरान तीनों ने खुद को भारतीय नागरिक बताते हुए शपथपत्र भी दिया था।
तीनों के खिलाफ प्राथमिकी की बात
मामले में जमशेदपुर में तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने की बात कही जा रही है। अब प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में किस स्तर पर शामिल हुए और इसके लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया।
भाजपा विधायक ने सरकार पर साधा निशाना
जमशेदपुर ईस्ट की भाजपा विधायक पूर्णिमा दास साहू ने मामले को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सवाल उठाया कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची तक कैसे पहुंच गए। विधायक ने कहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक है या इसके पीछे कोई और कारण है, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जब संबंधित लोग भारतीय नागरिक ही नहीं हैं तो उनके नाम भारतीय मतदाता सूची में कैसे शामिल हुए और दस्तावेजों की जांच किस स्तर पर की गई, यह गंभीर सवाल है।
‘एसआईआर में मामला सामने नहीं आता तो क्या होता?’
विधायक ने सवाल उठाया कि अगर एसआईआर के दौरान यह मामला सामने नहीं आता तो क्या ये विदेशी नागरिक भारतीय लोकतंत्र में मतदान का अधिकार हासिल कर लेते। उन्होंने मतदाता सूची की सत्यापन व्यवस्था और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। पूर्णिमा दास साहू ने कहा कि इस तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जा सकती। अब प्रशासन की जांच से यह स्पष्ट होगा कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में किस प्रक्रिया और किन दस्तावेजों के आधार पर शामिल हुए।