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Jharkhand: गठबंधन में खटपट और 'साईं' की शरण! कांग्रेस की हार के बाद सीएम हेमंत के दौरे से सियासी हलचल तेज

Sat, 20 Jun 2026 12:45 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

राज्यसभा चुनाव के बाद झारखंड की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अचानक दिल्ली दौरा और उसके बाद परिवार के साथ शिरडी जाना राजनीतिक चर्चाओं का केंद्र बना हुआ है। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार की हार के बाद महागठबंधन के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं।
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शिरडी के साईबाबा धाम में सीएम हेमंत सोरेन - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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राज्यसभा चुनाव के परिणाम आने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का अचानक दिल्ली दौरा और फिर परिवार के साथ शिरडी पहुंचना झारखंड की राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाओं को जन्म दे रहा है। हालांकि, दिल्ली में उनकी किन नेताओं से मुलाकात हुई और क्या बातचीत हुई? इसकी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन राजनीतिक हलकों में इसे महत्वपूर्ण सियासी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है।
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परिवार सहित शिरडी पहुंचे सीएम सोरेन
शनिवार को मुख्यमंत्री परिवार सहित शिरडी पहुंचे, जहां उन्होंने सिरडी साईबाबा मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया। इस दौरान शिरडी साईं संस्थान की ओर से मुख्यमंत्री और उनकी पत्नी विधायक कल्पना सोरेन को सम्मानित भी किया गया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि शिरडी में दर्शन से उन्हें मानसिक शांति और सुकून प्राप्त हुआ।

कांग्रेस खेमे में निराशा का माहौल 
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, राज्यसभा चुनाव में झामुमो के बैद्यनाथ राम और एनडीए समर्थित परिमल नाथवानी की जीत के बाद कांग्रेस खेमे में निराशा का माहौल है। कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा की हार के बाद महागठबंधन के भीतर बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस नेताओं ने राजद और भाकपा-माले पर सहयोग नहीं करने का आरोप लगाया है, जबकि दोनों दलों ने भी कांग्रेस नेतृत्व पर पलटवार किया है।
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झामुमो नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकता है
इसी बीच मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के झारखंड लौटने के बाद गठबंधन की स्थिति और भविष्य की रणनीति पर समीक्षा बैठक होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि झामुमो भविष्य में नए राजनीतिक विकल्पों पर विचार कर सकता है। हालांकि जयराम महतो, सरयू राय या भाजपा के संभावित समर्थन जैसे समीकरणों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है और यह फिलहाल केवल राजनीतिक अटकलों और चर्चाओं तक सीमित है।

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मुख्यमंत्री की वापसी के बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों पर राज्य की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि राज्यसभा चुनाव के बाद झारखंड की राजनीति नए मोड़ पर खड़ी दिखाई दे रही है।
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