झारखंड में माध्यमिक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में सफलता पाने वाले 102 अभ्यर्थियों की स्नातकोत्तर और बीएड की डिग्रियां संदेह के घेरे में आ गई हैं। राज्य के दो निजी विश्वविद्यालयों से जारी की गई इन डिग्रियों को विभागीय स्तर पर हुई प्रारंभिक जांच में प्रथम दृष्टया संदेहास्पद पाया गया है। इस खुलासे के बाद उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग ने मामले की विस्तृत पड़ताल पूरी होने तक संबंधित अभ्यर्थियों की नियुक्ति पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से प्रारंभिक जांच के पश्चात लिखे गए पत्र पर संज्ञान लेते हुए इस विस्तृत जांच की रूपरेखा तैयार की गई है।
सात सदस्यीय जांच समिति का गठन
प्रकरण की गहराई से जांच कराने के लिए सात सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। विभाग की अपर सचिव अंजलि यादव, आईएएस को इस समिति की अध्यक्षता सौंपी गई है, जबकि उप निदेशक अजय राज खलखो को समिति के सदस्य सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। समिति में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के प्रतिनिधि, विधि विभाग के प्रधान सचिव-सह-विधि परामर्शी और रांची विश्वविद्यालय के कुलसचिव सहित प्रमुख अधिकारी शामिल हैं।
15 दिन में जांच रिपोर्ट
कमेटी को 15 दिनों में अपनी जांच पूर्ण कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का स्पष्ट निर्देश दिया गया है। जांच प्रक्रिया के तहत समिति के सदस्य संबंधित दोनों निजी विश्वविद्यालयों का प्रत्यक्ष दौरा करेंगे और वहां अभ्यर्थियों के मूल शैक्षणिक दस्तावेज का भौतिक सत्यापन करेंगे। इस दौरान अभ्यर्थियों के प्रवेश पत्र, फीस रसीद, उपस्थिति पंजी, सेमेस्टरवार अंकपत्र और व्यावहारिक परीक्षा की कॉपी सहित सभी आवश्यक अभिलेखों का बारीकी से मिलान किया जाएगा।
प्राप्तांकों और अध्ययन अंतराल में संदेहास्पद स्थिति
डिग्रियों की विस्तृत जांच का फैसला लेने के पीछे कई महत्वपूर्ण तथ्य और प्राप्तांकों का एक खास पैटर्न सामने आया है। दोनों निजी विश्वविद्यालयों से स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त करने वाले 93 सफल अभ्यर्थियों के प्राप्तांक 65 से 70 प्रतिशत के दायरे में दर्ज हैं। विषयवार आंकड़ों पर नजर डालें तो खोरठा विषय में सफल कुल नौ अभ्यर्थियों में से छह अभ्यर्थी एक ही विश्वविद्यालय के हैं और इन सभी के अंक 67 से 68 प्रतिशत के बीच हैं।
इसी तरह राजनीति शास्त्र विषय में स्नातकोत्तर करने वाले 14 सफल अभ्यर्थियों में से नौ अभ्यर्थियों ने 67 से 68 प्रतिशत अंक हासिल किए हैं। गृह विज्ञान विषय में भी ऐसा ही रुख दिखाई दिया है, जहां 13 सफल अभ्यर्थियों में से सात अभ्यर्थियों के प्राप्तांक 66 से 67 प्रतिशत के मध्य पाए गए हैं।
पढ़ाई के अंतराल से जुड़े तथ्य भी उजागर
शैक्षणिक योग्यता की जांच में पढ़ाई के अंतराल से जुड़े तथ्य भी उजागर हुए हैं। 11 अभ्यर्थियों ने स्नातक की पढ़ाई संपन्न करने के 10 वर्ष या उससे अधिक समय के बाद स्नातकोत्तर की उपाधि हासिल की है। इसके अतिरिक्त 20 से अधिक अभ्यर्थियों के स्नातक और स्नातकोत्तर के अध्ययन काल के बीच आठ से नौ वर्ष का लंबा अंतर देखा गया है। आंकड़ों से यह भी स्पष्ट हुआ है कि 24 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति वर्ष 2025 में ही अपनी स्नातकोत्तर परीक्षा उत्तीर्ण की है। वहीं 25 अभ्यर्थियों ने नियुक्ति प्रक्रिया प्रारंभ होने से केवल एक वर्ष पूर्व स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी और 17 अभ्यर्थियों ने भर्ती वाले वर्ष में ही निजी विश्वविद्यालय से अपनी बीएड की पढ़ाई पूरी की है।
भर्ती प्रक्रिया और आयोग की अनुशंसा
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग की ओर से राज्य में माध्यमिक आचार्य के कुल 1,373 पदों पर सीधी भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। परीक्षा संपन्न होने के बाद आयोग ने 877 पदों पर अभ्यर्थियों की नियुक्ति के लिए शिक्षा विभाग को अपनी अनुशंसा भेजी थी। अब इन सफल अभ्यर्थियों के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों और डिग्रियों की जांच रिपोर्ट आने के उपरांत ही नियुक्ति पत्र वितरण को लेकर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इस कारण 102 अभ्यर्थियों की जांच पर अभ्यर्थियों एवं विभाग की निगाहें टिकी हुई हैं।