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झारखंड: खूंटी में NH-20 का आधा किलोमीटर हिस्सा वर्षों से जर्जर, ग्रामीणों ने सड़क के गड्ढों में खुद भरी मिट्टी

Tue, 20 Oct 2026 09:02 AM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड में सांडीगांव के पास NH-20 का करीब आधा किलोमीटर हिस्सा वर्षों से जर्जर है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां लगातार दुर्घटनाएं होती हैं, लेकिन विभाग की ओर से की गई अस्थायी मरम्मत भी कुछ दिनों में उखड़ जाती है। सांसद कालीचरण मुंडा इस मुद्दे को बैठकों में उठा चुके हैं।
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जर्जर सड़क - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड के खूंटी जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग-20 (NH-20) का करीब आधा किलोमीटर हिस्सा वर्षों से जर्जर हालत में है। सांडीगांव के पास सड़क पर जगह-जगह बड़े गड्ढे हैं और ऊपरी परत उखड़ चुकी है। ग्रामीणों का दावा है कि इस हिस्से में लगातार हादसे होते हैं और कई लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। विभाग की ओर से स्थायी मरम्मत नहीं होने से परेशान ग्रामीण अब खुद सड़क के गड्ढों में मिट्टी भरकर आवागमन को सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
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सड़क पर गड्ढे, उखड़ी परत और बिखरे पत्थर
रांची। खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड अंतर्गत सांडीगांव के पास तुपुदाना से जैतगढ़ जाने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग-20 का करीब आधा किलोमीटर हिस्सा वर्षों से जर्जर है। सड़क की हालत इतनी खराब है कि यहां से गुजरना राहगीरों और वाहन चालकों के लिए लगातार जोखिम भरा बना हुआ है।

सड़क की तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि कई जगह इसकी ऊपरी परत पूरी तरह उखड़ चुकी है। जगह-जगह कंकड़-पत्थर बिखरे हैं, किनारों पर मिट्टी फैली हुई है और सड़क के बीचोंबीच कई बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश के दिनों में इन गड्ढों में पानी भर जाने से स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।
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ग्रामीणों का दावा, सड़क हादसों में गई कई लोगों की जान
ग्रामीणों का कहना है कि जर्जर सड़क के कारण इस हिस्से में आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। उनके मुताबिक, कई लोगों की जान जा चुकी है, जबकि अनेक लोग हादसों में घायल होकर स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए हैं। इसके बावजूद सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं होने से ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

मुर्गे की बलि देकर भी जताया था विरोध
सड़क की बदहाली के खिलाफ ग्रामीण पहले भी कई बार विरोध जता चुके हैं। नाराज ग्रामीणों ने सड़क पर ही मुर्गे की बलि देकर पूजा-पाठ तक किया था। इसके बाद विभाग की ओर से एक-दो स्थानों पर मरम्मत के नाम पर पैबंद लगाए गए, लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक, ये मरम्मत दो-चार दिनों में ही उखड़ गई। इससे लोगों की परेशानी कम होने के बजाय नाराजगी और बढ़ गई।

सांसद भी बैठकों में उठा चुके हैं सड़क का मुद्दा
खूंटी के सांसद कालीचरण मुंडा भी दिशा की बैठकों में कई बार इस सड़क की समस्या उठा चुके हैं। इसके बावजूद करीब आधा किलोमीटर लंबे जर्जर हिस्से की स्थायी मरम्मत नहीं हो पाना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार शिकायत और विरोध के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।

अंधविश्वास से जुड़ी चर्चाएं, लेकिन कोई प्रमाण नहीं
लगातार उपेक्षा से निराश ग्रामीणों के बीच अब तरह-तरह की चर्चाएं भी होने लगी हैं। कुछ लोग अंधविश्वास के आधार पर मानने लगे हैं कि इस स्थान पर कोई दुष्ट शक्ति है, जो सड़क बनने नहीं देती और दुर्घटनाओं का कारण बनती है। हालांकि, ऐसी धारणाओं का कोई प्रमाण नहीं है। इन चर्चाओं से वर्षों से चली आ रही परेशानी और प्रशासनिक उदासीनता को लेकर ग्रामीणों की निराशा जरूर सामने आती है।

विभाग ने नहीं की स्थायी मरम्मत, ग्रामीणों ने संभाला मोर्चा
जब विभागीय स्तर पर सड़क की स्थायी मरम्मत नहीं हुई तो आखिरकार ग्रामीणों ने खुद ही मोर्चा संभाल लिया। ग्रामीण अब सड़क के गड्ढों में मिट्टी भरकर आवागमन को कुछ हद तक सुरक्षित बनाने की कोशिश कर रहे हैं। हालांकि, यह अस्थायी उपाय है और इससे सड़क की मूल समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो सकता।

ग्रामीणों ने की गुणवत्तापूर्ण पुनर्निर्माण की मांग
ग्रामीणों का सवाल है कि राष्ट्रीय राजमार्ग के इस महत्वपूर्ण हिस्से की स्थायी मरम्मत आखिर कब होगी? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है? ग्रामीणों ने मांग की है कि सड़क की महज खानापूर्ति वाली मरम्मत के बजाय पूरे जर्जर हिस्से का गुणवत्तापूर्ण और स्थायी पुनर्निर्माण कराया जाए, ताकि आए दिन होने वाले हादसों पर रोक लग सके।
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