झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व राज्यसभा सांसद और उद्योगपति परिमल नाथवानी को भारतीय जनता पार्टी का समर्थन मिलने के बाद चुनावी समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। भाजपा और एनडीए नेताओं की सक्रियता ने आगामी चुनाव को और अधिक दिलचस्प बना दिया है।
सोमवार को परिमल नाथवानी ने भाजपा के मुख्य सचेतक एवं हटिया विधायक नवीन जायसवाल के आवास पर पहुंचकर वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की। इस दौरान भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू, नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी सहित एनडीए के कई विधायक और प्रमुख नेता मौजूद रहे। बैठक में राज्यसभा चुनाव को लेकर रणनीति और आगामी राजनीतिक गतिविधियों पर चर्चा की गई।
भाजपा के समर्थन से मजबूत हुई दावेदारी
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा का समर्थन मिलने के बाद परिमल नाथवानी की दावेदारी को नई मजबूती मिली है। बैठक के दौरान एनडीए नेताओं ने उनके समर्थन में एकजुटता का संदेश देने की कोशिश की। इससे चुनावी माहौल और अधिक रोचक हो गया है।
झारखंड से रहा है पुराना जुड़ाव
परिमल नाथवानी का झारखंड की राजनीति से पुराना संबंध रहा है। वे वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हो चुके हैं। इसके अलावा वे आंध्र प्रदेश से भी राज्यसभा का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। तीन बार उच्च सदन तक पहुंच चुके नाथवानी की उम्मीदवारी इस बार भी राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है।
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विधानसभा का क्या है गणित?
झारखंड विधानसभा की कुल 81 सीटों में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के 34 विधायक हैं। कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के 4 और भाकपा (माले) के 2 विधायक हैं। इस तरह इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है। वहीं, भाजपा के 21 विधायक हैं। इसके अलावा जनता दल (यूनाइटेड), आजसू पार्टी और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के एक-एक विधायक के साथ एनडीए की कुल संख्या 24 तक पहुंचती है। सदन में एक विधायक जयराम कुमार महतो भी हैं, जिनकी भूमिका को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं जारी हैं।
परिणामों पर टिकीं निगाहें
राज्यसभा चुनाव को लेकर दोनों खेमों में राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। भाजपा द्वारा परिमल नाथवानी को समर्थन दिए जाने के बाद चुनावी मुकाबले ने नया मोड़ ले लिया है। अब राजनीतिक दलों के साथ-साथ आम लोगों की निगाहें भी आगामी मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में राज्यसभा चुनाव को लेकर झारखंड की राजनीति में और भी हलचल देखने को मिल सकती है।