विरोध-प्रदर्शन करतीं रिम्स की नर्सें
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रांची स्थित राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान, जिसे झारखंड का एम्स कहा जाता है, एक बार फिर अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चा में है। अस्पताल में कार्यरत नर्सों ने कामकाज बंद कर दिया है। नर्सों का आरोप है कि ड्यूटी के दौरान मरीज के परिजनों द्वारा उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और हंगामा किया गया, जिसके बाद उन्होंने कार्य बहिष्कार का निर्णय लिया।
मरीज के परिजनों पर गंभीर आरोप
नर्सों के अनुसार, मेडिसिन A2B वार्ड में शाम लगभग चार बजे मरीज हसीब अंसारी के अटेंडेंट के साथ विवाद हुआ। इस दौरान ड्यूटी पर तैनात नर्स अनुपमा कुमारी तिर्की के साथ कथित रूप से मारपीट की गई। नर्स अनुपमा तिर्की का कहना है कि आरोपी अटेंडेंट खुद को कांग्रेस नेता और स्वास्थ्य मंत्री का आदमी बताकर धमकी दे रहा था और उसी ने उनके साथ ज्यादती की।
प्रबंधन से शिकायत, उलटा मिला जवाब
घटना के बाद जब नर्स अनुपमा तिर्की ने रिम्स प्रबंधन से शिकायत की, तो उनका आरोप है कि प्रबंधन ने कार्रवाई करने के बजाय उन्हें ही डांट दिया। इससे नर्सिंग स्टाफ में रोष और असुरक्षा की भावना और गहरी हो गई। नर्सों का कहना है कि ड्यूटी के दौरान वे खुद को पूरी तरह असुरक्षित महसूस करती हैं।
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ट्रॉमा सेंटर के बाहर विरोध-प्रदर्शन
घटना से आक्रोशित नर्सों ने रिम्स के ट्रॉमा सेंटर के बाहर आंदोलन शुरू कर दिया। प्रदर्शन के दौरान वे डायरेक्टर और डिप्टी सुपरिटेंडेंट को मौके पर बुलाने और अपनी सुरक्षा की गारंटी देने की मांग करती नजर आईं। नर्सों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उनकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगी।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
रिम्स के स्टाफ का कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। बार-बार होने वाली ऐसी घटनाएं न सिर्फ कर्मचारियों का मनोबल तोड़ती हैं, बल्कि मरीजों की सेवाओं को भी प्रभावित करती हैं। फिलहाल नर्सों का कार्य बहिष्कार जारी है और अस्पताल की व्यवस्था पर इसका असर दिखने लगा है।