झारखंड में आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता निशा भगत की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी एवं पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने ने हेमंत सोरेन सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आदिवासी अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाली सामाजिक कार्यकर्ता की संदिग्ध हालात में हुई आत्महत्या को जनजातीय समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं पर आघात करार दिया है। दोनों पूर्व मुख्यमंत्रियों ने प्रकरण की केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआइ) से निष्पक्ष जांच कराने के साथ ही पिठौरिया थाना के दरोगा और अजय तिर्की को तत्काल गिरफ्तार करने की मांग उठाई है।
भू-माफिया को राजनीतिक संरक्षण का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि झारखंड में जमीन के दलालों को सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। अजय तिर्की जैसे तत्व पूरे प्रदेश में सक्रिय हैं, लेकिन प्रशासन उनके विरुद्ध मिली शिकायतों पर कोई कार्रवाई नहीं करता। आदिवासियों की भूमि और अधिकारों से जुड़े विषयों में लगातार सुनवाई न होना, गंभीर चिंता का विषय है। आरोपियों के खिलाफ ठोस कदम न उठाए जाने से ऐसे असामाजिक तत्वों का दुस्साहस लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने पूरे प्रकरण में जमीन दलालों को राजनीतिक संरक्षण की भी निष्पक्षता से जांच कराने पर बल दिया है।
फेसबुक लाइव में झलकी व्यवस्था से निराशा
निशा भगत ने अपना जीवन समाप्त करने से पूर्व फेसबुक लाइव आकर व्यवस्था के प्रति अपनी घोर निराशा प्रकट की थी। पूर्व मुख्यमंत्री ने उल्लेख किया कि उनके वीडियो में न्याय न मिल पाने की वेदना स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। उन्होंने सवाल खड़ा किया कि जनजातीय समाज के अधिकारों की रक्षा के लिए निरंतर आवाज उठाने वाली महिला को किन विकट परिस्थितियों के कारण आत्मघाती कदम उठाने पर विवश होना पड़ा। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि पीड़िता द्वारा उठाए गए गंभीर प्रश्नों और पुलिस के समक्ष पूर्व में दर्ज शिकायतों की बिना किसी बाहरी दबाव के निष्पक्ष जांच होनी अनिवार्य है, ताकि घटना का सच जनता के सामने आ सके।
मुख्यमंत्री से त्यागपत्र की मांग और आंदोलन
प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि यदि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य में शांति और सुरक्षा व्यवस्था संभालने में असमर्थ हैं, तो उन्हें तत्काल त्यागपत्र दे देना चाहिए। उन्होंने निशा भगत को न्याय मिलने तक संघर्ष जारी रखने का आह्वान किया। हालांकि, मामले में लगाए आरोपों की निष्पक्ष पुष्टि जारी पुलिस जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आने के बाद ही संभव हो सकेगी।
डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग
वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा ने भी कहा कि निशा ने अपनी मृत्यु से पूर्व फेसबुक लाइव के जरिये कई लोगों पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने मांग की, मामले में निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए फेसबुक लाइव वीडियो सहित सभी डिजिटल साक्ष्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरी तरह सुरक्षित रखा जाए। उन्होंने यह भी कहा कि फेसबुक लाइव में लगाए आरोपों की गंभीरता से जांच होनी चाहिए और उसमें उल्लिखित हर व्यक्ति की भूमिका की जांच की जानी चाहिए। जांच में जो भी व्यक्ति दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई होना आवश्यक है।
राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार से पूरे मामले पर जवाब देने को कहा है। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि जब आदिवासी समाज की एक बेटी न्याय की गुहार लगा रही थी, तब पूरी व्यवस्था कहां थी। उन्होंने पूछा कि पीड़िता द्वारा की गई शिकायतों पर सरकार ने क्या कार्रवाई की तथा क्या उन्हें समय पर आवश्यक सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी? पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सवालों का उत्तर देना राज्य सरकार की जिम्मेदारी है। आदिवासी अधिकारों की रक्षा का दावा करने वाली सरकार को इस पर जवाब देना होगा। उन्होंने शोकाकुल परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए परिजनों और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की।