झारखंड के जंगलों में फरार चल रहे नौ इनामी माओवादियों की तलाश में राज्य पुलिस जुटी हुई है। राज्य से माओवाद का समापन लगभग हो चुका है, लेकिन ये वांछित आरोपी अब तक फरार हैं। पुलिस इन माओवादियों के पड़ोसी राज्यों में भागने की सूचना पर सत्यापन कर रही है।
हाल के कुछ महीनों में आधा दर्जन से अधिक इनामी माओवादी पड़ोसी राज्य बंगाल भाग गए थे। वहां पहुंचकर कई माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर दिया, जबकि कुछ गिरफ्तार भी किए गए। दो दिन पहले ही 7 लाख रुपये के इनामी माओवादी दंपती ने कोलकाता पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। इसके अलावा कुछ माओवादी ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भी आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
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प्रमुख इनामी माओवादी
झारखंड पुलिस की तलाश सूची में भाकपा माओवादी की रीजनल कमेटी का सदस्य नितेश यादव उर्फ इरफान उर्फ नंदू उर्फ किरानी शामिल है, जिस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित है। इसके साथ ही टीएसपीसी का जोनल कमांडर आरिफ उर्फ शशिकांत उर्फ सुदेश उर्फ सुरेश, जोनल कमांडर मनोहर गंझू उर्फ सोहन गंझू उर्फ दिनेश गंझू और जोनल कमांडर गोदराय यादव उर्फ संजय यादव भी फरार चल रहे हैं। इन तीनों ही आरोपियों पर 10-10 लाख रुपये का इनाम तय है।
अन्य फरार कमांडर
पुलिस की सूची में 5-5 लाख रुपये के इनामी सब जोनल कमांडर पंकज कोरवा और सब जोनल कमांडर राजू भुइया भी शामिल हैं। इनके अलावा पीएलएफआइ का एरिया कमांडर बलराम लोहरा उर्फ जटु उर्फ मजनू, जिस पर दो लाख रुपये का इनाम है, तथा एक लाख रुपये का इनामी एलजीएस सदस्य सामुएल बुढ़ उर्फ सामू भी भागा फिर रहा है। वहीं टीएसपीसी का एक लाख रुपये का इनामी सदस्य सुदेश गंझू उर्फ गुरुदेव भी पुलिस की पकड़ से दूर है।