मेदिनीनगर के जीवन ज्योति नर्सिंग होम में दो प्रसूताओं की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई की है। सिविल सर्जन डॉ. ए.के. श्रीवास्तव ने अस्पताल का क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
मेदिनीनगर के जीएलए कॉलेज रोड पर स्थित जीवन ज्योति नर्सिंग होम में दो प्रसूताओं की मौत के मामले में स्वास्थ्य विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सिविल सर्जन डॉ ए के श्रीवास्तव ने उक्त नर्सिंग होम का क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट रजिस्ट्रेशन तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग के इस कड़े फैसले के बाद अब इस अस्पताल में मरीजों की नई भर्ती, प्रसव और किसी भी प्रकार के ऑपरेशन पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है।
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जांच के लिए पांच डॉक्टरों की टीम
अस्पताल परिसर में उपलब्ध सभी चिकित्सा सुविधाओं की जांच के लिए स्वास्थ्य विभाग ने पांच डॉक्टरों की एक विशेष टीम का गठन किया है। इस जांच दल को अगले 72 घंटे के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने का निर्देश जारी किया गया है।
जानकारी के अनुसार, नर्सिंग होम की संचालिका डॉ प्रिया सिन्हा द्वारा प्रस्तुत किया गया जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। उन्होंने दोनों प्रसूताओं की मौत के कारणों के संदर्भ में जो भी विवरण दिया था, वह अपर्याप्त था।
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टीम में ये डॉक्टर
गठित की गई इस जांच टीम में डॉ सुषमा सबनम होरो, डॉ नीलम होरो, डॉ अर्चना तिवारी, डॉ गौतम यादव और डीडीएम शशिकांत तिवारी को शामिल किया गया है। यह टीम अस्पताल की व्यवस्थाओं की जांच करेगी।
नवजात बच्चे एएनएम के भरोसे छूटे
बताया गया है कि शुक्रवार की रात और शनिवार की सुबह दो महिलाओं की प्रसव के बाद मौत हो गई थी। इस घटना के सामने आते ही हड़कंप मच गया। आरोप है कि घटना के बाद नर्सिंग होम की संचालिका डॉ प्रिया सिन्हा और अस्पताल के अन्य कर्मचारी मरीजों को छोड़कर मौके से चले गए। कर्मचारियों के चले जाने के कारण वहां मौजूद नवजात बच्चे केवल एक एएनएम के भरोसे रह गए थे। इस पूरे मामले में अब स्वास्थ्य विभाग की जांच जारी है।