जांच के दौरान बरामद एक्सपायरी अनाज
- फोटो : Amar Ujala
राजकीय श्रावणी मेला आस्था और विश्वास का सबसे बड़ा पर्व है। देशभर से आने वाले लाखों श्रद्धालु यहां भोजनालयों और दुकानों पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में मेले के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में लापरवाही श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य के साथ बड़ा खिलवाड़ साबित हो सकती है। शुक्रवार को जिला प्रशासन की संयुक्त खाद्य सुरक्षा टीम ने मंदिर मोड़ और आसपास के भोजनालयों, थोक विक्रेताओं एवं वितरकों के प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान बड़ी मात्रा में कथित एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री बरामद होने से हड़कंप मच गया।
10 किलो एक्पायरी आटा मिला
जांच के दौरान सिद्धि विनायक ट्रेडिंग में फॉर्च्यून ब्रांड का करीब 360 बैग, यानी लगभग 10 हजार किलो कथित एक्सपायर्ड आटा मिला। इसके अलावा इमामी ब्रांड का करीब 80 बैग, यानी लगभग 800 किलो बेसन भी बरामद किया गया। प्रशासन ने पूरे स्टॉक को तत्काल अलग कर सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। संबंधित प्रतिष्ठान के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत कार्रवाई की जाएगी।वहीं, 'देसी जायका' भोजनालय की रसोई में अत्यधिक गंदगी मिलने पर जुर्माना लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई। दूसरी ओर, एक ऑनलाइन उपभोक्ता शिकायत के आधार पर 'इंडियन स्पाइस मटन हाउस' की भी विस्तृत जांच की गई। अन्य प्रतिष्ठानों में पनीर की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई।
10 टन कथित एक्सपायर्ड आटा पहुंचा कैसे?
इतनी बड़ी मात्रा में कथित एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री मिलने के बाद सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर यह स्टॉक नियमित निगरानी के बावजूद गोदाम तक कैसे पहुंचा और इतने लंबे समय तक वहां पड़ा कैसे रहा? यदि यह सामग्री बाजार या भोजनालयों तक पहुंच जाती, तो बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता था। प्रशासन ने सभी खाद्य कारोबारियों को साफ-सफाई और खाद्य मानकों का कड़ाई से पालन करने की चेतावनी दी है। श्रद्धालुओं की शिकायत के लिए 24 घंटे का हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया गया है।
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श्रावणी मेला केवल आस्था का पर्व नहीं, बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था की भी परीक्षा है। अब देखना होगा कि यह कार्रवाई केवल नोटिस तक सीमित रहती है या जिम्मेदार लोगों पर ऐसी कार्रवाई होती है, जिससे भविष्य में श्रद्धालुओं की थाली तक पहुंचने वाले भोजन की गुणवत्ता से कोई समझौता न हो।