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न पढ़ाई की पर्याप्त जगह, न पानी: रिम्स में बुनियादी सुविधाओं की कमी, डॉक्टरों ने दी कार्य बहिष्कार की चेतावनी

Wed, 14 Oct 2026 03:52 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

रिम्स में एमबीबीएस की सीटें 180 से बढ़ाकर 250 कर दी गई हैं, लेकिन प्रयोगशालाओं, उपकरणों, छात्रावासों और पेयजल की सुविधाओं में कमी बनी हुई है। विद्यार्थियों और चिकित्सकों ने प्रदर्शन किया। मांगें पूरी नहीं होने पर 22 अक्टूबर से कार्य बहिष्कार की चेतावनी दी।

 

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राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स)। फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में एमबीबीएस की सीटें 180 से बढ़ाकर 250 कर दी गई हैं, लेकिन इसके साथ ही संस्थान की बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वर्ष 2026 में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों का कहना है कि सीटों की संख्या बढ़ने के बावजूद प्रयोगशालाओं और छात्रावासों में सुविधाओं का विस्तार नहीं हुआ है। रिम्स की प्रयोगशालाओं में 200 से 250 विद्यार्थियों के बैठने और अध्ययन के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा आवश्यक उपकरणों की भी भारी कमी बनी हुई है, जिससे मेडिकल विद्यार्थियों की प्रयोगात्मक पढ़ाई प्रभावित हो रही है।

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प्रयोगशालाओं और छात्रावास में संकट
चिकित्सा की पढ़ाई में प्रयोगात्मक अभ्यास अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, परंतु संसाधनों के अभाव में पठन-पाठन पर विपरीत असर पड़ रहा है। विद्यार्थियों ने छात्रावास के प्रबंध पर भी गहरी नाराजगी जताई है। छात्रावासों में पीने का साफ पानी ठीक से उपलब्ध नहीं होता है, जिसके कारण छात्रों को हर दिन या एक दिन छोड़कर लगभग 30 रुपये खर्च करके बाहर से पानी खरीदना पड़ रहा है। इसके अतिरिक्त छात्रावास के शौचालयों में नल टूटे पड़े हैं और पानी की टंकियों की नियमित सफाई भी ठीक से नहीं होती है। इस अव्यवस्था से छात्रों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।

काली पट्टी बांधकर किया प्रदर्शन
इस बीच बुधवार को इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) झारखंड संयुक्त चिकित्सा आंदोलन के तहत रिम्स में सैकड़ों चिकित्सक एकत्र हुए। इस विरोध प्रदर्शन में रिम्स के मेडिकल विद्यार्थी भी अपनी मांगों के समर्थन में काली पट्टी बांधकर शामिल हुए। चिकित्सकों और विद्यार्थियों ने मिलकर अपनी मांगों तथा समस्याओं के खिलाफ आवाज उठाई। चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल ने रिम्स निदेशक कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। चिकित्सकों ने मुख्य रूप से मांग की कि झारखंड में मेडिकल प्रोटेक्शन एक्ट को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।
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कार्य बहिष्कार की दी चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने डॉक्टरों की पुख्ता सुरक्षा, बेहतर सेवा व्यवस्था और विद्यार्थियों की समस्याओं के त्वरित समाधान की मांग रखी है। चिकित्सा संगठनों ने इन मांगों को लेकर 21 अक्तूबर को राज्यव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित करने का एलान किया है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, तो 22 अक्तूबर से चिकित्सक पूर्ण कार्य बहिष्कार करेंगे। रिम्स में सीटें बढ़ने से डॉक्टरों की नई पौध तैयार करने का अवसर तो मिला है, परंतु प्रयोगशाला, उपकरण, छात्रावास और पीने के पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाए बिना गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना संभव नहीं है।

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