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झारखंड: न सड़क, न पुल… मौत के बाद भी संघर्ष! खटिया पर नदी पार कर घर पहुंचाया युवती का शव

Wed, 09 Sep 2026 01:51 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लातेहार

सार

उग्रवाद प्रभावित लातेहार के कई गांव आज भी सड़क, पुल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहे हैं। चंदवा प्रखंड के किता अंबाटांड़ गांव में पार्वती देवी का शव पोस्टमार्टम के बाद एंबुलेंस से गांव लाया गया, लेकिन बदहाल सड़क और पुल के कारण एंबुलेंस आगे नहीं बढ़ सकी।
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खाट पर शव ले जाते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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उग्रवाद प्रभावित लातेहार जिले के कई गांव आज भी सड़क, पुल और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। सड़क और पुल की बदहाल स्थिति का खामियाजा ग्रामीणों को हर दिन भुगतना पड़ता है। सरकारी योजनाओं और आपातकालीन सेवाओं का लाभ भी समय पर गांवों तक नहीं पहुंच पाता। हालात इतने गंभीर हैं कि किसी ग्रामीण के बीमार पड़ने पर एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती और मरीज को खटिया पर रखकर अस्पताल ले जाना पड़ता है। कई बार समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मरीज रास्ते में ही दम तोड़ देते हैं।

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लातेहार के चंदवा प्रखंड की सेरक पंचायत के किता अंबाटांड़ गांव का ताजा मामला ग्रामीणों की इस परेशानी की तस्वीर सामने लाता है। रविवार को चंदवा रेलवे क्रॉसिंग के समीप मालगाड़ी की चपेट में आने से अंबाटांड़ निवासी विरु तुरी की पत्नी पार्वती देवी की मौत हो गई थी। पोस्टमार्टम के बाद सोमवार को शव परिजनों को सौंप दिया गया। शव लेकर एंबुलेंस गांव पहुंची, लेकिन खराब सड़क और पुल की समस्या के कारण वह आगे नहीं जा सकी।

एंबुलेंस फंसी तो खटिया पर रखकर नदी पार कराया शव

एंबुलेंस के रास्ते में फंस जाने के बाद ग्रामीणों ने शव को उतारा और खटिया पर रखा। इसके बाद ग्रामीण और परिजन शव को लेकर नदी पार कराने में जुट गए। करीब डेढ़ से दो घंटे की मशक्कत के बाद शव को घर तक पहुंचाया जा सका। इस दौरान परिजनों और ग्रामीणों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। यह घटना बताती है कि गांव में सड़क और पुल जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को किस तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सामान्य दिनों में आवागमन की परेशानी के अलावा आपात स्थिति में यह समस्या जानलेवा साबित हो सकती है।

आजादी के बाद से गांव तक नहीं बनी सड़क

गांव की मुखिया अनिता देवी ने बताया कि आजादी के बाद से अब तक गांव तक सड़क का निर्माण नहीं हुआ है। गांव पहुंचने के लिए ग्रामीणों को दो नदियां पार करनी पड़ती हैं। उन्होंने बताया कि एक नदी पर दो बार पुल का निर्माण कराया गया, लेकिन दोनों बार बरसात के दौरान पुल बह गया। वहीं, दूसरी जगह अब तक स्थायी पुल का निर्माण नहीं हो सका है।

बच्चों की पढ़ाई से लेकर इलाज तक प्रभावित

ग्रामीणों के अनुसार, सड़क और पुल की सुविधा नहीं होने का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा है। बरसात के मौसम में स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा बीमार लोगों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को अस्पताल पहुंचाना भी बड़ी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और पुल नहीं होने के कारण जरूरत के समय एंबुलेंस समेत अन्य आपातकालीन सेवाएं भी गांव तक नहीं पहुंच पाती हैं। ऐसे में मरीजों को खटिया या अन्य साधनों के जरिए मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है।

सांसद और विधायक को कई बार दिया ज्ञापन

मुखिया अनिता देवी ने बताया कि सड़क और पुल निर्माण की मांग को लेकर सांसद कालीचरण सिंह, विधायक प्रकाश राम और जिला प्रशासन को कई बार ज्ञापन दिया जा चुका है। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ है।
ग्रामीणों ने जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क और स्थायी पुल का निर्माण कराने की मांग की है, ताकि गांव के लोगों को आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इस तरह की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

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