झारखंड में दस साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटीईटी) का सफल आयोजन के बाद अभ्यर्थियों के चेहरों पर बड़ी राहत और नई उम्मीद नजर आई। रविवार को इसपरीक्षा के बाद अभ्यर्थियों के सपनों और उम्मीदों का नए दौर का भी आगाज हो गया। परीक्षा का रोचक कहानियां
हजारीबाग स्थित कार्मेल स्कूल परीक्षा केंद्र के बाहर 52 वर्षीय एक अभ्यर्थी की संघर्ष गाथा विशेष रूप से आकर्षण का केंद्र रही, जो पिछले 22 वर्षों से इस शिक्षक पात्रता परीक्षा का अवसर मिलने का इंतजार कर रहे थे। 52 साल की उम्र में भी शिक्षक बनने का संकल्प बनाए रखने वाले इन अभ्यर्थी की खास बात यह रही कि इस बार उनके साथ उनकी बेटी, बेटा और दामाद ने भी परीक्षा दी। एक ही परिवार के चार सदस्यों द्वारा एक साथ परीक्षा में शामिल होने को लेकर उन्होंने अपनी खुशी जताई। उन्होंने आशा जताई कि परिवार के सभी सदस्य परीक्षा में सफलता हासिल करेंगे।
56 की उम्र में सरकारी शिक्षक बनने का सपना, मिथिलेश ने दी परीक्षा
गिरिडीह जिले के गांवा प्रखंड निवासी 56 वर्षीय मिथिलेश कुमार ने सरकारी शिक्षक बनने की उम्मीद में शिक्षक पात्रता परीक्षा दी। उन्होंने कोडरमा के झुमरीतिलैया स्थित सेक्रेड हार्ट स्कूल परीक्षा केंद्र पर यह परीक्षा दी। मिथिलेश वर्ष 2008 से अपने गांव के पास उत्क्रमित मध्य विद्यालय, राजखारा में पारा शिक्षक के रूप में लगातार सेवा दे रहे हैं। नियमित सरकारी शिक्षक पद पर नियुक्ति पाने के लिए अब उनके सेवाकाल के करीब चार साल ही शेष बचे हैं।
मिथिलेश कुमार 90 के दशक से ही सरकारी शिक्षक बनने की निरंतर तैयारी कर रहे हैं। वर्ष 2016 में भी उन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा दी थी, लेकिन कुछ अंकों से पिछड़ जाने के कारण सफलता हासिल नहीं कर सके थे। इसके बाद उन्हें दोबारा परीक्षा देने के लिए करीब 10 साल का लंबा इंतजार करना पड़ा। लगभग 18 वर्षों से बच्चों को शिक्षा दे रहे मिथिलेश ने इस बार प्रश्नपत्र के स्तर पर संतोष जताया है और सफलता मिलने की उम्मीद जताई है।मिथिलेश कुमार का कहना है कि यदि परिणाम समय पर आ जाता है, तो वह अपने सेवाकाल के बचे हुए चार साल एक नियमित सरकारी शिक्षक के रूप में बच्चों को पढ़ाने में बिता सकेंगे। उनके लिए यह परीक्षा सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि वर्षों पुराने सपने को पूरा करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
2012 में किया था बीएड, नियमित अंतराल पर परीक्षा कराने की मांग
हजारीबाग के स्थित कार्मेल स्कूल परीक्षा केंद्र पर 38 वर्षीय परीक्षार्थी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने वर्ष 2012 में ही अपनी बीएड की पढ़ाई पूरी कर ली थी। लेकिन राज्य में लंबे समय तक जेटीईटी का आयोजन नहीं होने के कारण उन्हें परीक्षा देने के लिए 10 साल तक इंतजार करना पड़ा। उन्होंने बताया कि उनका पेपर काफी अच्छा हुआ है और अब उन्हें उम्मीद है कि परीक्षा के बाद शिक्षक नियुक्ति की प्रक्रिया भी जल्द आगे बढ़ेगी। केंद्र के बाहर मौजूद कई अभ्यर्थियों ने सरकार से मांग उठाई कि जेटीईटी का आयोजन नियमित अंतराल पर होना चाहिए, ताकि युवाओं को वर्षों तक इंतजार न करना पड़े।
20 मिनट की देरी से पहुंची, तो बिखर गए सपने
कोडरमा जिले के झुमरी तिलैया स्थित गांधी स्कूल रोड पर बने महात्मा गांधी उच्च विद्यालय परीक्षा केंद्र पर 20 मिनट की देरी से पहुंचने के कारण महिला अभ्यर्थी प्रीति कुमारी को परीक्षा से वंचित कर दिया गया।
गिरिडीह जिले के सरिया क्षेत्र से आई अभ्यर्थी प्रीति अपने परीक्षा केंद्र पर सुबह 9:20 बजे पहुंचीं। केंद्र पर अभ्यर्थियों के लिए सुबह सात बजे से प्रवेश आरंभ किया गया था, जबकि नौ बजे के बाद प्रवेश पूरी तरह बंद कर दिया गया था। वह तेजी से दौड़कर मुख्य द्वार तक पहुंचीं, लेकिन वहां तैनात पुलिस के जवानों ने नियमों का हवाला देते हुए उन्हें भीतर जाने से मना कर दिया। अभ्यर्थी लगातार मिन्नतें करती रहीं और अंदर जाने की गुहार लगाती रहीं, पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें मुख्य द्वार से बाहर ही रोक दिया। प्रीति ने बताया कि वह पिछले तीन वर्षों से इस परीक्षा की तैयारी कर रही थीं।