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जेपीएससी मेधा घोटाला: रिजल्ट से पहले 267 अभ्यर्थियों का डाटा लीक, सीआईडी ने दाखिल किया आरोप पत्र

Mon, 26 Oct 2026 08:11 PM IST
प्रतीक कुमार पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की 14वीं प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान सीआईडी ने रांची की विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर कई साक्ष्य पेश किए हैं। सीआईडी के अनुसार, परीक्षा परिणाम जारी होने से पहले 267 चयनित अभ्यर्थियों का गोपनीय डाटा परीक्षा एजेंसी के कर्मचारी उस्मान को वाट्सएप पर भेजा गया था। 
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झारखंड लोक सेवा आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) की चौदहवीं प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम जारी होने से पहले ही चयनित अभ्यर्थियों का पूरा विवरण लीक हो गया था। सीआईडी ने जेपीएससी मेधा घोटाले, ओएमआर शीट में हेराफेरी और प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच करते हुए रांची स्थित विशेष सीआईडी अदालत में आरोप पत्र दाखिल कर सबूत पेश किए हैं।
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सीआईडी के अनुसार, चौदहवीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम प्रकाशन से पूर्व ही आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता ने परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्रा. लि. के कर्मचारी उस्मान के वाट्सएप पर चयनित अभ्यर्थियों की गोपनीय जानकारी साझा कर दी थी। दोनों के बीच हुई वाट्सएप बातचीत से स्पष्ट हुआ है कि परीक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारियां लीक की गई थीं। इस माध्यम से अन्य राज्यों के सफल अभ्यर्थियों सहित कुल 267 चयनित अभ्यर्थियों का डाटा वाट्सएप पर भेजा गया था। इनमें बिहार के सर्वाधिक 146, उत्तर प्रदेश के 82 और हरियाणा के 14 अभ्यर्थी शामिल थे। सीआईडी इस नेटवर्क के अन्य सहयोगियों के बारे में भी जानकारी जुटा रही है।

लीक में प्रश्न व उत्तर भी शामिल
श्वेता कुमारी गुप्ता और उस्मान के बीच वाट्सएप पर चौदहवीं जेपीएससी परीक्षा से जुड़े प्रश्न और उत्तर भी साझा हुए थे। इसके अलावा ओएमआर शीट के पुनर्मूल्यांकन, अभ्यर्थियों के अनुक्रमांक तथा सफल होने वाले अभ्यर्थियों की श्रेणीवार व कोटिवार संख्या भी साझा की गई थी।
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आरोप पत्र में जेपीएससी के वर्तमान सचिव के निजी सहायक अरुण कुमार का बयान भी शामिल है। अरुण कुमार ने सीआईडी को बताया कि तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के पदभार संभालने के बाद से आयोग में नियम-कानून ताक पर रखकर परीक्षाएं संचालित हो रही थीं। इसमें श्वेता कुमारी गुप्ता बराबर की भागीदार थीं और एल. खियांग्ते के हर जुर्म में सहयोग कर रही थीं। गोपनीय शाखा के निजी सहायक सोनू कुमार को भी इसकी पूरी जानकारी थी और वह अध्यक्ष तथा उप परीक्षा नियंत्रक का सहयोग कर रहा था।

कॉल रिकॉर्ड से उजागर हुए तथ्य
सीआईडी की जांच में कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (सीडीआर) से कई खुलासे हुए हैं। श्वेता कुमारी गुप्ता और जेपीएससी कर्मी सोनू कुमार के बीच 14 अगस्त, 2024 से 18 जुलाई 2026 के मध्य कुल 635 बार बातचीत हुई। सीआईडी ने 20 जुलाई, 2026 को प्राथमिकी दर्ज की थी। सोनू और तत्कालीन परीक्षा नियंत्रक सह सचिव के बीच 10 मई, 2025 से नौ जुलाई, 2026 के दौरान 119 बार बातचीत हुई।

संदिग्धों के बीच निरंतर संपर्क
सोनू और तत्कालीन सदस्य डॉ. अजिता भट्टाचार्य के निजी सहायक ब्रज कुमार राम के बीच चार सितंबर, 2024 से 28 जनवरी, 2026 के मध्य 83 बार बात हुई। ब्रज कुमार राम ने ही परीक्षा संचालन एजेंसी बिंसिस को काम दिलाने के लिए एल. खियांग्ते के मिजोरम स्थित आवास पर 2.50 लाख रुपये नकद पहुंचाए थे।

श्वेता गुप्ता और टीडीपीएल कर्मी उस्मान के बीच 17 जून, 2025 से 21 जुलाई, 2026 के मध्य 674 बार फोन पर बात हुई। श्वेता की तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते से सात जून, 2025 से 15 जुलाई, 2026 के बीच 301 से 304 बार बातचीत हुई। टीडीपीएल के स्कैनिंग प्रभारी प्रदीप कुमार सिंह से 19 मार्च, 2026 से 14 जुलाई, 2026 के बीच 74 बार और हेमंत वर्मा से 16 जनवरी, 2026 से 20 जुलाई, 2026 के मध्य 44 बार बात हुई। सीआईडी ने टीडीपीएल संचालक रामवीर सिंह, अरुण कुमार, ऋतु कुमार राम, उस्मान के दूसरे नंबर तथा संजय कुमार के कॉल रिकॉर्ड भी अदालत में पेश किए हैं।
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