फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जेपीएससी घोटाला: परीक्षा एजेंसी का मार्केटिंग मैनेजर मुख्य साजिशकर्ता, सीआईडी ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया

Wed, 28 Oct 2026 09:20 AM IST
आशुतोष प्रताप सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, उत्तरपुस्तिकाओं में गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक के मामले में CID ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी ने परीक्षा कराने वाली कंपनी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी को कथित तौर पर घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है।
विज्ञापन
(प्रतीकात्मक फोटो) - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित धांधली, उत्तरपुस्तिकाओं में गड़बड़ी और प्रश्नपत्र लीक के मामले में अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने अदालत में आरोपपत्र दाखिल किया है। जांच एजेंसी ने परीक्षा कराने वाली कंपनी मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी को कथित तौर पर पूरे घोटाले का मुख्य साजिशकर्ता बताया है। आरोपपत्र के अनुसार, अभय तिवारी ने परीक्षा संचालन व्यवस्था का दुरुपयोग कर खुद और अपने परिजनों को विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनुचित तरीके से सफलता दिलाई। CID ने अपनी जांच में परीक्षा एजेंसियों, अधिकारियों और अभ्यर्थियों के बीच कथित सांठगांठ का भी उल्लेख किया है।

परीक्षा एजेंसी के कर्मचारी पर परीक्षा प्रणाली में हेरफेर का आरोप

CID के अनुसार, अभय तिवारी ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित किया। आरोप है कि उसने न केवल खुद विभिन्न परीक्षाओं की मेरिट सूची में जगह बनाई, बल्कि अपने करीबियों के परिणामों में भी हेरफेर कराया। आरोपपत्र के मुताबिक, अभय तिवारी का झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की स्नातकोत्तर प्रशिक्षित शिक्षक प्रतियोगिता परीक्षा में अंतिम रूप से चयन हुआ था। इसके अलावा उसने JSSC की स्नातक स्तरीय संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा (CGL) में 48वां स्थान प्राप्त किया था। अभय तिवारी ने झारखंड लोक सेवा आयोग की खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद की लिखित परीक्षा भी पास की थी और साक्षात्कार में शामिल हुआ था। इसके अतिरिक्त उसने सहायक वन संरक्षक और एफएओ की प्रारंभिक परीक्षाओं में भी कथित तौर पर अनुचित तरीकों से सफलता हासिल की।

पत्नी, भाई और साले को भी लाभ पहुंचाने का आरोप

CID की ओर से अदालत में दाखिल आरोपपत्र में अभय तिवारी के परिजनों की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता का भी उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, उसकी पत्नी सुषमा कुमारी ने 14वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी। इसके अलावा सुषमा कुमारी ने JPSC की बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) प्रारंभिक परीक्षा और JSSC की स्नातक स्तरीय परीक्षा में भी सफलता हासिल की थी।

विज्ञापन


आरोपपत्र के मुताबिक, अभय तिवारी के भाई अक्षय तिवारी और साले सौरभ कुमार ने भी 14वीं झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रारंभिक परीक्षा पास की थी। अक्षय तिवारी ने JSSC की स्नातक स्तरीय परीक्षा में भी सफलता प्राप्त की थी। CID का आरोप है कि इन परीक्षाओं में सफलता दिलाने के पीछे कथित सांठगांठ और धांधली की भूमिका थी। जांच एजेंसी ने इन घटनाओं को परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी के व्यापक मामले से जोड़ते हुए आरोपपत्र में शामिल किया है।

तीन परीक्षा एजेंसियों के बीच सांठगांठ का आरोप

जांच रिपोर्ट के अनुसार, परीक्षा संचालन से जुड़ी टीडीपीएल, वेबेल और आईसीएन एजेंसियों ने कथित तौर पर आपस में सांठगांठ कर व्यवस्था को प्रभावित किया। आरोप है कि इन एजेंसियों ने अपने पसंदीदा अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाया। जांच में अधिकारियों और परीक्षा एजेंसियों के बीच मिलीभगत की बात भी सामने आई है। CID के आरोपपत्र में झारखंड लोक सेवा आयोग की तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, उनके पति विक्रम मेघवाल और टीडीपीएल के संचालक रामबीर सिंह की हवाई यात्रा का भी उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इन तीनों ने परीक्षा एजेंसी के खर्च पर हवाई सफर किया था।

व्हाट्सएप चैट, हवाई यात्रा और बैंक खातों की जांच

जांच अधिकारियों ने व्हाट्सएप चैट, एयरलाइंस के रिकॉर्ड और बैंक खातों के विवरण का विश्लेषण किया। CID के अनुसार, इन दस्तावेजों से पुष्टि हुई कि श्वेता कुमारी गुप्ता, विक्रम मेघवाल और रामबीर सिंह ने 28 मई को रांची से हैदराबाद तक एक साथ हवाई यात्रा की थी। आरोपपत्र में कहा गया है कि इस यात्रा का पूरा खर्च टीडीपीएल एजेंसी ने उठाया था। CID इस मामले में कथित रूप से शामिल अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच एजेंसी का कहना है कि परीक्षा में धांधली और कथित मिलीभगत से जुड़े पहलुओं की पड़ताल जारी है। हालांकि, आरोपपत्र में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय अदालत में सुनवाई के बाद होगा।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें