असम विधानसभा चुनाव को लेकर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बड़ा फैसला लिया है। पार्टी अब ‘एकला चलो’ की रणनीति पर आगे बढ़ेगी, क्योंकि सीट बंटवारे को लेकर कांग्रेस के साथ उसकी सहमति नहीं बन पाई। दोनों दलों के बीच लंबे समय तक बातचीत चली, लेकिन अंततः कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकल सका। हालांकि, झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडेय ने कहा कि गठबंधन में सब कुछ ठीक है और असम चुनाव का झारखंड गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती थी JMM
दरअसल, झामुमो की योजना थी कि वह कांग्रेस के साथ मिलकर असम विधानसभा चुनाव लड़े, ताकि विपक्षी वोटों का बिखराव रोका जा सके। इसी उद्देश्य से झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और विधायक कल्पना सोरेन ने दिल्ली जाकर कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच सीट बंटवारे को लेकर विस्तृत चर्चा भी हुई, लेकिन कई दौर की बातचीत के बाद भी कोई सहमति नहीं बन सकी।
इन मुद्दों पर नहीं बनी बात
सूत्रों के अनुसार, सीटों की संख्या और क्षेत्रीय दावेदारी को लेकर दोनों दल अपने-अपने रुख पर अड़े रहे, जिसके कारण गठबंधन की संभावनाएं समाप्त हो गईं। इसके बाद झामुमो ने स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने का निर्णय लिया।
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अब तक पार्टी ने 19 सीटों पर उतारे उम्मीदवार
पार्टी ने असम विधानसभा चुनाव में 19 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारने का एलान कर दिया है। इतना ही नहीं, झामुमो ने दो सीटों पर अपने प्रत्याशियों को पार्टी का सिंबल भी दे दिया है, जिससे चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया गया है। इस फैसले के साथ ही यह स्पष्ट हो गया है कि झामुमो इस बार असम में अपनी संगठनात्मक ताकत और स्थानीय मुद्दों के सहारे चुनावी मैदान में उतरेगा। पार्टी नेतृत्व को उम्मीद है कि वह अपने आधार वोट और जनसंपर्क के बल पर बेहतर प्रदर्शन कर सकेगी।