यूपीआई डिजिटल लेनदेन पर शुल्क लगाने के प्रस्ताव के विरोध में हजारीबाग चैंबर ऑफ कॉमर्स की ओर से विरोध धरना दिया गया। प्रदर्शन में चैंबर के पदाधिकारियों के साथ शहर के कई प्रमुख व्यवसायियों ने भी हिस्सा लिया। व्यापारियों ने सरकार से यूपीआई भुगतान व्यवस्था को पहले की तरह पूरी तरह शुल्क मुक्त रखने की मांग की।
धरने में शामिल व्यापारियों ने कहा कि यूपीआई की सबसे बड़ी खासियत इसकी आसान और तेज भुगतान व्यवस्था है। नकदी के बिना लेनदेन होने से कारोबारियों और ग्राहकों दोनों के लिए भुगतान प्रक्रिया आसान हुई है। व्यापारियों का कहना था कि यूपीआई को शुल्क के दायरे में लाने से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के प्रयासों पर असर पड़ सकता है।
शुल्क लगाने से बढ़ेगा आर्थिक बोझ
धरने को संबोधित करते हुए चैंबर अध्यक्ष शंभूनाथ अग्रवाल ने कहा कि यूपीआई ने देश की भुगतान व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाने से व्यापारियों के साथ-साथ आम ग्राहकों पर भी अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने सरकार से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और छोटे कारोबारियों की लागत नहीं बढ़ाने की मांग की। चैंबर की मुख्य मांग है कि यूपीआई व्यवस्था को पहले की तरह सरल और शुल्क मुक्त रखा जाए।
आंदोलन तेज करने की चेतावनी
चैंबर सचिव राकेश ठाकुर ने कहा कि यूपीआई ने रोजमर्रा के लेनदेन को काफी आसान बनाया है। इस पर शुल्क लगने से व्यापारियों के व्यावसायिक खर्च पर सीधा असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार यूपीआई पर शुल्क लगाने का फैसला वापस नहीं लेती है, तो चैंबर आंदोलन को और तेज करेगा।
प्रदर्शनकारी व्यापारियों ने चेतावनी दी कि जरूरत पड़ने पर हजारीबाग के व्यापारी यूपीआई से भुगतान लेना और देना पूरी तरह बंद करने का फैसला भी कर सकते हैं। चैंबर ने सरकार से प्रस्ताव पर पुनर्विचार कर यूपीआई को शुल्क मुक्त रखने की मांग की।