झारखंड में उग्रवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (TPC) के तीन सक्रिय सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। उनकी निशानदेही पर पुलिस ने तीन AK-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इसके साथ ही करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति भी जब्त की गई है। पुलिस का कहना है कि यह कार्रवाई आत्मसमर्पण कर चुके उग्रवादियों से मिली गुप्त सूचना के आधार पर की गई।
आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों की सूचना से मिली सफलता
पुलिस के अनुसार, झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत उग्रवादी संगठनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। हाल ही में आत्मसमर्पण करने वाले उग्रवादियों से मिली गुप्त सूचनाओं के आधार पर पुलिस ने टीपीसी के नेटवर्क की पड़ताल शुरू की। इसी सूचना के आधार पर बोकारो पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी कर कार्रवाई की।
पूछताछ में सामने आई संगठन की गतिविधियां
गिरफ्तार उग्रवादियों से पूछताछ के दौरान संगठन की गतिविधियों और उससे जुड़े कई लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने 28 जुलाई को आगे कार्रवाई करते हुए टीपीसी के विभिन्न स्तर के कमांडरों से जुड़े एक सक्रिय सदस्य को गिरफ्तार किया। उसकी निशानदेही पर कई ठिकानों पर छापेमारी की गई।
3 AK-47, 8 मैगजीन और 288 कारतूस बरामद
छापेमारी के दौरान पुलिस ने तीन AK-47 राइफल, आठ मैगजीन और 288 जिंदा कारतूस बरामद किए। पुलिस ने इसे बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि इससे टीपीसी के हथियारबंद नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है।
2.20 करोड़ की संपत्ति जब्त
कार्रवाई के दौरान पुलिस ने उग्रवादियों से जुड़ी करीब 2 करोड़ 20 लाख रुपये की चल-अचल संपत्ति भी जब्त की। इसमें 15 लाख रुपये नकद, एक चारपहिया वाहन, करीब 20 लाख रुपये मूल्य की जमीन और अन्य संपत्तियां शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, प्रभात महतो उर्फ मंगर से जुड़ी करीब 1.20 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई है। वहीं मनोहर उर्फ मोहन विश्वकर्मा से 15 लाख रुपये नकद समेत अन्य संपत्ति बरामद की गई है।
एरिया कमांडर भी गिरफ्तार
गिरफ्तार आरोपियों में गोलू उर्फ रिंकू लाल उर्फ उज्जवल भी शामिल है, जिसे पुलिस टीपीसी का एरिया कमांडर बता रही है। पुलिस का कहना है कि इस कार्रवाई से संगठन की गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा। पुलिस ने कहा कि झारखंड सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत उग्रवादियों को हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने का अवसर दिया जा रहा है। प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े अन्य सदस्यों से भी अपील की गई है कि वे हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करें और सरकार की पुनर्वास नीति का लाभ उठाएं। पुलिस का कहना है कि झारखंड को उग्रवाद मुक्त बनाने के लिए अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। सुरक्षा एजेंसियां उग्रवादी संगठनों के नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही हैं।