Ranchi: झारखंड सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर IAS अधिकारियों का तबादला किया है। 35 से अधिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां दी गई हैं। खूंटी के DC सौरभ कुमार भुवानिया को देवघर का नया उपायुक्त बनाया गया है, जबकि कई जिलों और विभागों में अहम बदलाव किए गए हैं।
झारखंड सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारियों का बड़े पैमाने पर तबादला और पदस्थापन किया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार 35 से अधिक अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कई जिलों के उपायुक्त बदले गए हैं, जबकि कई अधिकारियों को महत्वपूर्ण विभागीय दायित्व दिए गए हैं।
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सौरभ भुवानिया बने देवघर के नए उपायुक्त
सरकार द्वारा जारी आदेश के मुताबिक सौरभ कुमार भुवानिया को खूंटी के उपायुक्त पद से हटाकर देवघर का नया उपायुक्त नियुक्त किया गया है। वहीं मोहम्मद जावेद हुसैन को पलामू के उप विकास आयुक्त पद से पदोन्नत कर खूंटी का नया उपायुक्त बनाया गया है।
कई जिलों के उपायुक्तों को नई जिम्मेदारी
शेखर जमुआर को पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त पद से हटाकर सुवर्णरेखा परियोजना, जमशेदपुर में नई जिम्मेदारी दी गई है। वहीं अनन्य मित्तल को गढ़वा के उपायुक्त पद से हटाकर झारखंड राज्य आजीविका संवर्धन सोसायटी (जेएसएलपीएस) का मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी बनाया गया है।
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स्वास्थ्य और शिक्षा विभाग में भी बदलाव
शशि प्रकाश सिंह को देवघर उपायुक्त पद से हटाकर स्वास्थ्य विभाग में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अलावा कीर्तिश्री जी को गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग में अपर सचिव नियुक्त किया गया है। वहीं समीरा एस. को स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग में संयुक्त सचिव तथा दिनेश कुमार यादव को स्वास्थ्य विभाग में संयुक्त सचिव बनाया गया है।
जिला परिषद और उप विकास आयुक्त स्तर पर भी फेरबदल
विष्णु श्रीकांत यशवंत को गिरिडीह के अनुमंडल पदाधिकारी पद से हटाकर गोड्डा का उप विकास आयुक्त-सह-जिला परिषद मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी नियुक्त किया गया है। वहीं अभिषेक रंजन को खूंटी के अनुमंडल पदाधिकारी पद से गुमला में उप विकास आयुक्त-सह-जिला परिषद मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी की जिम्मेदारी दी गई है।
सरकार ने बताई फेरबदल की वजह
सरकार का मानना है कि इस प्रशासनिक फेरबदल से विभागीय कार्यों में तेजी आएगी और योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने और विकास कार्यों की निगरानी को मजबूत करने के उद्देश्य से यह बड़ा बदलाव किया गया है।