झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के चुनाव में मुकाबला रोचक हो गया है। एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने से चुनाव त्रिकोणीय बनता दिख रहा है। जीत के लिए 28 वोट जरूरी हैं, जबकि एनडीए के पास 24 विधायक हैं।
झारखंड में दो राज्यसभा सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब त्रिकोणीय मुकाबले में बदलता नजर आ रहा है। उद्योगपति एवं एनडीए समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी के मैदान में उतरने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। एनडीए के पास 24 विधायकों का समर्थन माना जा रहा है, जबकि जीत के लिए 28 वोटों की आवश्यकता है। ऐसे में उनकी नजर अन्य दलों के विधायकों पर टिकी हुई है। कई विधायकों से उनकी बातचीत भी हो चुकी है।
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राजनीतिक गलियारों अटकलें तेज
परिमल नाथवानी के नामांकन पत्र को लेकर विवाद भी चर्चा का विषय बना हुआ है। नामांकन में कथित त्रुटियों को लेकर कांग्रेस नेताओं ने विरोध और धरना-प्रदर्शन किया था, लेकिन निर्वाचन पदाधिकारी ने उनके नामांकन को वैध घोषित कर दिया। इसके बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। महागठबंधन की ओर से झामुमो ने बैद्यनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है। झामुमो के पास 34 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस के 16 और राजद के 4 विधायक हैं। एक उम्मीदवार की जीत के लिए 28 वोट जरूरी हैं। ऐसे में कांग्रेस उम्मीदवार की जीत महागठबंधन की एकजुटता पर निर्भर मानी जा रही है।
अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं उम्मीदवार
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड के राज्यसभा चुनावों में अक्सर अंतिम समय तक समीकरण बदलते रहे हैं। परिमल नाथवानी की उम्मीदवारी के बाद क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक जोड़-तोड़ की संभावनाओं पर भी चर्चा हो रही है। झारखंड में इस तरह का कई बार हो चुका है। क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग यहां पर कोई नई बात नहीं है। हालांकि एनडीए और महागठबंधन दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं।
अब सभी की नजर 18 जून को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी है, जिससे यह साफ हो जाएगा कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर किसका कब्जा होता है।