फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

झारखंड: धालभूमगढ़ हवाई अड्डे का रास्ता साफ, हेमंत सोरेन सरकार ने केंद्र को भेजी संशोधित रिपोर्ट

Tue, 06 Oct 2026 02:42 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

धालभूमगढ़ हवाई अड्डे के निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ी है। झारखंड सरकार ने केंद्र की 19 पर्यावरणीय आपत्तियों का जवाब भेज दिया है। प्रस्तावित एयरपोर्ट पुरानी हवाई पट्टी का पुनर्विकास होगा। अब स्टेज-1 वन स्वीकृति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।

 

विज्ञापन
सीएम हेमंत सोरेन फ़ाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

जमशेदपुर के धालभूमगढ़ में प्रस्तावित हवाई अड्डे के निर्माण का रास्ता साफ होता दिख रहा है। झारखंड सरकार ने केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की ओर से उठाई गई सभी 19 पर्यावरणीय आपत्तियों का विस्तृत जवाब और संशोधित अनुपालन रिपोर्ट तैयार कर केंद्र को भेज दी है। राज्य सरकार ने रिपोर्ट को केंद्रीय परिवेश पोर्टल पर भी अपलोड कर दिया है। अब केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय से प्रथम चरण (स्टेज-1) की वन स्वीकृति मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। मंजूरी मिलने के बाद हवाई अड्डे के पुनर्विकास से जुड़ी प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।

पुरानी हवाई पट्टी का होगा पुनर्विकास

विज्ञापन

वन विभाग ने केंद्रीय मंत्रालय को भेजे जवाब में स्पष्ट किया है कि धालभूमगढ़ में किसी नए वन क्षेत्र को काटकर ग्रीनफील्ड हवाई अड्डा नहीं बनाया जा रहा है। प्रस्तावित स्थल पर द्वितीय विश्व युद्ध के समय विकसित की गई पुरानी और परित्यक्त हवाई पट्टी पहले से मौजूद है। इसी हवाई पट्टी का पुनर्विकास किया जाना है।

वर्तमान में जमशेदपुर का सोनारी हवाई अड्डा घनी आबादी वाले शहरी क्षेत्र में स्थित है। सोनारी हवाई अड्डे का रनवे छोटा है और इसके विस्तार के लिए आसपास पर्याप्त जमीन उपलब्ध नहीं है। ऐसे में यहां एटीआर-72 जैसे बड़े व्यावसायिक विमानों का परिचालन संभव नहीं हो पा रहा है। जमशेदपुर से करीब 55 किलोमीटर दूर धालभूमगढ़ को सामरिक और लॉजिस्टिक दृष्टि से उपयुक्त विकल्प माना गया है।

क्षतिपूरक वनीकरण और भूमि आवंटन
हवाई अड्डा परियोजना के लिए 99.256 हेक्टेयर वन भूमि आवंटित करने का प्रस्ताव है। नियमानुसार इसके बदले दोगुनी यानी 198.512 हेक्टेयर अवकृष्ट वन भूमि पर 10 वर्षों तक क्षतिपूरक वनरोपण किया जाएगा। इसके लिए चाकुलिया वन क्षेत्र के बाघघोरी, करोडिया, सांपधारा, कुचीकनाली, बडीहा, झारिया और गुगुड़िया समेत कई स्थलों को चिह्नित किया गया है।

प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार परियोजना क्षेत्र में कुल 79,332 पेड़ और बांस दर्ज किए गए हैं। इनमें अधिकांश वृक्ष 10 से 30 सेंटीमीटर व्यास वाली श्रेणी के हैं। हवाई अड्डे के संचालन के लिए आवश्यक बिजली और पानी की लाइनें मौजूदा राइट ऑफ वे से ही लाई जाएंगी। इससे अतिरिक्त वन भूमि के अधिग्रहण की जरूरत नहीं पड़ेगी। परियोजना का संशोधित लागत-लाभ अनुपात 1:48.6 निर्धारित किया गया है।

हाथी कॉरिडोर से सुरक्षित दूरी

विज्ञापन

वन विभाग ने परियोजना क्षेत्र के आसपास हाथी कॉरिडोर और मानव-हाथी संघर्ष को लेकर उठाई गई आपत्तियों का भी जवाब दिया है। रिपोर्ट के अनुसार घाटशिला-काकड़ाझोर हाथी कॉरिडोर परियोजना स्थल से करीब 15 किलोमीटर दूर है। मुसाबनी-चाकुलिया कॉरिडोर करीब 13 किलोमीटर और डुमरिया-कुंदलुका-मुरकानजिया कॉरिडोर लगभग 17 किलोमीटर दूर है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले पांच वर्षों में परियोजना क्षेत्र के आसपास मानव-हाथी संघर्ष के मामले बेहद सीमित रहे हैं। इसके बावजूद वन्यजीवों की सुरक्षा और उनके प्राकृतिक आवास के विखंडन के प्रभाव को कम करने के लिए प्रयोक्ता एजेंसी अपने खर्च पर विस्तृत स्थल-विशिष्ट वन्यजीव प्रबंधन योजना तैयार करेगी। इसमें हाथियों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए आवश्यक उपाय शामिल किए जाएंगे।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें