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Jharkhand: ट्रैकिंग से बचने के लिए नक्सलियों का नया हथियार, अब एप से मांग रहे रंगदारी; पुलिस के लिए नई चुनौती

Sat, 16 May 2026 06:36 PM IST
झारखंड ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीतामढ़ी

सार

झारखंड में नक्सली अब 'जंगल एप' के जरिए हाईटेक तरीके से लेवी वसूली कर रहे हैं। इसके कारण पुलिस के लिए कॉल की लोकेशन और पहचान ट्रैक करना मुश्किल हो रहा है। हालांकि, इस मामले में कुछ गिरफ्तारियां हुई हैं, जबकि सुरक्षा एजेंसियां तकनीकी नेटवर्क पर नजर रख रही हैं।
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नक्सली अब पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को दे रहे डिजिटल चुनौती - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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देश के गृह मंत्री अमित शाह ने वर्ष 2026 तक देश को नक्सलवाद मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन झारखंड में नक्सली संगठन लगातार अपने तौर-तरीकों में बदलाव कर रहे हैं। अब नक्सली पारंपरिक तरीकों को छोड़ तकनीक का सहारा लेते हुए हाईटेक माध्यमों से लेवी वसूली कर रहे हैं, जिससे पुलिस के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है।
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जंगल एप के जरिए लेवी मांग रहे नक्सली
ताजा मामला खूंटी जिले का है, जहां नक्सली संगठन कथित तौर पर 'जंगल एप' नामक मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए लेवी मांग रहे हैं। पुलिस के अनुसार, इस एप से किए जाने वाले कॉल की लोकेशन और पहचान का पता लगाना बेहद मुश्किल होता है। यही कारण है कि लेवी मांगने वाले नंबरों की ट्रैकिंग में पुलिस को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के सामने नई चुनौती
सूत्रों के मुताबिक, नक्सली संगठन अब संचार और नेटवर्किंग के लिए आधुनिक तकनीकों का तेजी से इस्तेमाल कर रहे हैं, ताकि सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी से बचा जा सके। तकनीक के इस बढ़ते इस्तेमाल ने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
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हालांकि, खूंटी पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए कई आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस को आशंका है कि अब भी कई लोग इस तरह के एप्लीकेशन का इस्तेमाल कर लेवी वसूली और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय हैं। ऋषभ गर्ग ने बताया कि गिरफ्तार नक्सली मोबाइल एप्स के जरिए लेवी मांगने के साथ-साथ आपसी संपर्क बनाए रखने का काम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि नक्सलियों की बदलती रणनीति पुलिस के लिए चुनौती जरूर है, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां लगातार ऐसे तकनीकी माध्यमों पर नजर रख रही हैं और जल्द ही इसका प्रभावी समाधान निकाल लिया जाएगा। 
 
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