झारखंड हाईकोर्ट ने रांची सदर थाना क्षेत्र में छिनतई के मामले में एक 16 वर्षीय नाबालिग को अवैध रूप से जेल भेजने के प्रकरण पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की अदालत ने इस मामले में राज्य के मुख्य सचिव को तलब किया। अदालत के निर्देश पर मुख्य सचिव वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए, जहां पीठ ने सरकार और सरकारी अधिवक्ताओं के बीच समन्वय के अभाव पर गहरी चिंता व्यक्त की।
अदालती नाराजगी और आश्वासन
सुनवाई के दौरान अदालत ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी वकील इस संवेदनशील मामले में सरकार का पक्ष सही ढंग से नहीं रख पा रहे हैं। इससे प्रशासनिक और कानूनी मोर्चे पर तालमेल की कमी उजागर होती है। मुख्य सचिव ने अदालत को आश्वस्त किया कि व्यवस्था को शीघ्र दुरुस्त किया जाएगा और कोर्ट के निर्देशों पर पूरी गंभीरता से अमल होगा। अदालत ने मुख्य सचिव के इस आश्वासन के बाद मामले की अगली सुनवाई 3 नवंबर को मुकर्रर की है। साथ ही उन्हें अगली पेशी में व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट प्रदान की है।
पढ़ें: जानें आपके शहर में कब दिखेगा चांद, बादल छाए रहने पर अर्घ्य देने के लिए एक्सपर्ट ने बताया उपाय
मुआवजा याचिका और मूल मामला
यह पूरा विवाद रांची के सदर थाना क्षेत्र से जुड़ा है, जहां पुलिस ने प्रार्थी अनीता देवी के 16 वर्षीय नाबालिग बेटे को गिरफ्तार करके सीधे जेल भेज दिया था। बाद में जन्म प्रमाण पत्र सामने आने पर निचली अदालत के आदेश के बाद बच्चे को डुमरदगा स्थित बाल सुधार गृह भेजा गया। इसी मामले में न्याय की गुहार लगाते हुए प्रार्थी ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर 20 लाख रुपये के मुआवजे का दावा किया है। अदालत में प्रार्थी की पैरवी कर रहे अधिवक्ता वेंकटेश कुमार ने तर्क दिया कि राज्य सरकार इस गंभीर प्रकरण में अपना पक्ष रखने से बच रही है।