झारखंड उच्च न्यायालय ने पलामू जिले के पंडवा प्रखंड के 104 किसानों को धान खरीद की बकाया राशि का भुगतान दो महीने के भीतर करने का निर्देश राज्य सरकार को दिया है। अदालत ने कहा कि जिन किसानों पर किसी तरह की गड़बड़ी का आरोप नहीं है, उनका शेष भुगतान बिना उचित आधार के नहीं रोका जा सकता। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति मनोज प्रसाद की पीठ ने राज्य सरकार को बकाया राशि अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराने का आदेश दिया है। इसके बाद यह राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
दो महीने में जमा करानी होगी बकाया 50 प्रतिशत राशि
उच्च न्यायालय ने पलामू जिला प्रशासन और राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि 104 किसानों की धान खरीद की शेष 50 प्रतिशत राशि दो महीने के भीतर अदालत की रजिस्ट्री में जमा कराई जाए। रजिस्ट्री इसके बाद संबंधित किसानों के बैंक खातों में सीधे भुगतान करेगी। अदालत ने जनहित याचिका दाखिल करने वाली आशा प्रसाद को निर्देश दिया है कि वह किसानों की पहचान और उनके बैंक खातों से संबंधित पूरा विवरण उच्च न्यायालय की रजिस्ट्री को उपलब्ध कराएं। पीठ ने पाया कि इन 104 किसानों को धान की सफल आपूर्ति के बदले पहले ही 50 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। उनके पास धान की आपूर्ति की पुष्टि करने वाली आधिकारिक रसीदें भी मौजूद हैं। ऐसे में उनके शेष भुगतान को रोकने का उचित आधार होना चाहिए।
1.71 करोड़ रुपये के भुगतान का मामला अदालत पहुंचा
यह मामला पलामू जिले के पंडवा प्रखंड स्थित पात्रा पैक्स के माध्यम से किसानों द्वारा सरकार को धान बेचने से जुड़ा है। कुल 128 किसानों की करीब 1.71 करोड़ रुपये की राशि लंबे समय से बकाया थी। किसानों को भुगतान की आधी रकम मिल गई थी, लेकिन शेष आधी राशि रोक दिए जाने के बाद मामला उच्च न्यायालय पहुंचा। इससे पहले भी उच्च न्यायालय ने 10 जुलाई 2024 को राज्य सरकार के आश्वासन के आधार पर बकाया राशि का भुगतान करने का आदेश दिया था। हालांकि, सरकार ने अदालत को बताया कि पलामू के उपायुक्त की जांच रिपोर्ट में पात्रा पैक्स के माध्यम से धान खरीद में कई स्तरों पर अनियमितताएं सामने आई हैं।
बाकी 24 किसानों के मामले में जांच के निर्देश
उच्च न्यायालय ने शेष 24 किसानों के मामले में राज्य सरकार को नियमानुसार जांच करने की छूट दी है। अदालत ने निर्देश दिया है कि सरकार एक महीने के भीतर इन किसानों के खिलाफ जांच की प्रक्रिया शुरू करे। पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि तय समय सीमा के भीतर इन 24 किसानों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं होती है या जांच पूरी नहीं की जाती है, तो राज्य सरकार को उन्हें भी बकाया राशि का भुगतान करना होगा। इस आदेश से उन किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनकी धान खरीद की राशि लंबे समय से लंबित है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन किसानों के खिलाफ गड़बड़ी का आधार नहीं है, उन्हें भुगतान के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कराया जा सकता।