झारखंड हाई कोर्ट ने पुलिस विभाग में दरोगा से इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति को लेकर चल रहे वरिष्ठता विवाद पर बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने वर्ष 2018 में सीधी भर्ती के माध्यम से नियुक्त दरोगाओं की याचिका मंजूर करते हुए उन्हें विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा से दरोगा बने पुलिसकर्मियों से वरिष्ठ माना है।
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झारखंड पुलिस में दरोगा से इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति को लेकर लंबे समय से चल रहा वरीयता विवाद अब खत्म हो गया है। झारखंड हाई कोर्ट ने वर्ष 2018 में सीधी भर्ती के जरिए नियुक्त हुए दरोगाओं के पक्ष में फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सेवा में वरिष्ठता के मामले में सीधी नियुक्ति से आए दरोगा ही वरिष्ठ माने जाएंगे। इस फैसले से राज्य पुलिस में दरोगा से इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति का रास्ता साफ हो गया है।
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न्यायमूर्ति दीपक रोशन की पीठ ने सीधी भर्ती वाले पुलिस अधिकारियों की याचिका स्वीकार करते हुए उनकी वरीयता को सही माना। सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से सिपाही पद से प्रोन्नत होकर दरोगा बने पुलिसकर्मियों और सीधी भर्ती वाले दरोगाओं के बीच वरिष्ठता को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। हाई कोर्ट के फैसले के बाद अब प्रोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
वरीयता सूची को लेकर शुरू हुआ था विवाद
पूरा मामला पुलिस विभाग की ओर से 9 सितंबर 2024 को जारी वरीयता सूची से जुड़ा है। विभाग ने इस सूची में सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से सिपाही से दरोगा बने पुलिसकर्मियों को वर्ष 2018 में सीधी भर्ती से नियुक्त दरोगाओं से ऊपर स्थान दिया था। विभाग के इस फैसले से सीधी भर्ती वाले दरोगाओं में असंतोष फैल गया। इसके बाद दरोगा उत्तम तिवारी और उनके अन्य साथियों ने विभाग की वरीयता सूची को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं ने सूची को नियमों के विपरीत बताते हुए निरस्त करने की मांग की थी।
सीधी भर्ती वाले दरोगाओं ने रखी ये दलील
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन ने अदालत में पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि नियमानुसार सीधी नियुक्ति के माध्यम से बहाल दरोगा सेवा में वरिष्ठ हैं। ऐसे में वरीयता सूची तैयार करते समय सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा के जरिए दरोगा बने पुलिसकर्मियों की तुलना में सीधी भर्ती वाले अधिकारियों को ऊपर रखा जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान अदालत ने विवादित वरीयता सूची के आधार पर होने वाली प्रोन्नति पर पहले ही रोक लगा दी थी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने सीधी भर्ती वाले दरोगाओं के तर्कों को स्वीकार करते हुए उनकी याचिका मंजूर कर ली।
अब इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति का रास्ता साफ
हाई कोर्ट के इस फैसले से झारखंड पुलिस में दरोगा से इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नति को लेकर बनी असमंजस की स्थिति दूर हो गई है। अब वर्ष 2018 में सीधी भर्ती से नियुक्त दरोगाओं की वरिष्ठता को मान्यता मिलने के बाद प्रोन्नति की प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ हो गया है।