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झारखंड: हाई कोर्ट से 34 शिक्षकों को बड़ी राहत, 2019 से मिलेगी वरिष्ठता; 12 सप्ताह की दी मोहलत

Sun, 01 Nov 2026 08:44 AM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

झारखंड हाईकोर्ट ने 2016 की शिक्षक भर्ती के 34 अभ्यर्थियों को फरवरी 2019 से वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ देने का निर्देश दिया है। अदालत ने राज्य सरकार को 12 सप्ताह में प्रक्रिया पूरी करने को कहा। शिक्षकों को वेतन निर्धारण और वेतन वृद्धि मिलेगी, लेकिन पिछला बकाया वेतन नहीं दिया जाएगा।
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झारखंड हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड हाई कोर्ट ने स्नातक प्रशिक्षित शिक्षक संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा-2016 के माध्यम से चयनित 34 शिक्षकों को बड़ी राहत प्रदान की है। न्यायमूर्ति दीपक रोशन की एकल पीठ ने राज्य सरकार को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि वह इन सभी शिक्षकों की नियुक्ति तिथि फरवरी 2019 से स्वीकार करे। इसके साथ ही अदालत ने राज्य प्रशासन को 12 सप्ताह की समयावधि के भीतर संपूर्ण प्रक्रिया पूरी करने का स्पष्ट आदेश दिया है। अदालत के अनुसार प्रशासनिक और कानूनी अड़चनों के कारण हुई देरी के लिए अभ्यर्थियों को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।
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सेवा लाभों और वरिष्ठता पर फैसला
अदालत ने सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि याचियों को फरवरी 2019 की नोशनल तिथि से वरिष्ठता, वेतन निर्धारण, उच्चतर वेतनमान और वार्षिक वेतन वृद्धि समेत सभी परिणामी सेवा लाभ दिए जाएं। हालांकि, पीठ ने यह भी तय किया कि शिक्षकों को इस पूर्व अवधि का बकाया वेतन प्राप्त नहीं होगा। अपने फैसले में न्यायमूर्ति ने पूर्ववर्ती अजय कुमार मामले के निर्णय को आधार बनाया। पीठ ने टिप्पणी की कि समान चयन प्रक्रिया का हिस्सा होने के बावजूद केवल नियुक्ति पत्र देर से मिलने के आधार पर किसी अभ्यर्थी को उसके अधिकार से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है। न्यायालय ने इसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14, 16 और 21 का सीधा उल्लंघन करार दिया।

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भर्ती प्रक्रिया और विषयवार विवरण
यह पूरा प्रकरण झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा वर्ष 2016 में जारी विज्ञापन संख्या 21/2016 से संबंधित है। इसके अंतर्गत विभिन्न विषयों के स्नातक प्रशिक्षित शिक्षकों के चयन के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी। याचिकाकर्ताओं ने इतिहास, नागरिक शास्त्र, भूगोल, अर्थशास्त्र, वाणिज्य, शारीरिक शिक्षा, कुड़ुख, संस्कृत, नागपुरी, अंग्रेजी, गणित, भौतिकी, जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान और हिंदी जैसे विषयों के लिए अपनी दावेदारी पेश की थी। आयोग की इस परीक्षा में उत्तीर्ण कई अन्य अभ्यर्थियों को लातेहार जिले में फरवरी 2019 के दौरान ही पदस्थापित कर दिया गया था, जबकि याचिकाकर्ताओं की नियुक्ति लंबे अंतराल के बाद हुई।
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विवाद की पृष्ठभूमि और अदालती प्रक्रिया
नियुक्ति में विलंब का मुख्य कारण राज्य के 13 अनुसूचित जिलों में लागू शत-प्रतिशत स्थानीय निवासी आरक्षण व्यवस्था थी। वर्ष 2020 में हाई कोर्ट की पूर्ण पीठ ने इस आरक्षण नीति को निरस्त कर दिया था। इसके बाद मामला सर्वोच्च न्यायालय पहुंचा, जहां शीर्ष अदालत ने नया विज्ञापन जारी करने के बजाय पुरानी भर्ती की ही संशोधित राज्यस्तरीय मेधा सूची तैयार करने के निर्देश दिए। इस आदेश के अनुपालन में आयोग ने संशोधित सूची जारी की, जिसके आधार पर याचिकाकर्ताओं को वर्ष 2023 में नियुक्ति मिली। इस विलंब के कारण शिक्षकों को सेवा अवधि और वरिष्ठता में भारी नुकसान उठाना पड़ रहा था, जिसे हाई कोर्ट ने अब दूर कर दिया है।
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