Jharkhand: झारखंड में शराब से होने वाली राजस्व प्राप्ति में इस वित्तीय वर्ष अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है, जिसमें सरकार के खजाने में 40,013.52 करोड़ रुपये आए हैं। अवैध शराब पर सख्ती के बाद सरकारी दुकानों से बिक्री बढ़ी है, जिससे राजस्व में भारी उछाल आया है।
राज्य में शराब से होने वाली कमाई ने इस बार सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। सरकार के खजाने में इस वित्तीय वर्ष 40,013.52 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि आई है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा लगभग 2,700 करोड़ रुपये के आसपास था। यानी राजस्व में उछाल नहीं, बल्कि विस्फोट हुआ है।
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सरकार के दावे और असल तस्वीर में अंतर
सरकार इसे पारदर्शिता और सख्ती का परिणाम बता रही है, लेकिन असल तस्वीर इससे अलग है। अवैध शराब पर नकेल कसी गई तो लोग सीधे सरकारी दुकानों की कतार में खड़े हो गए। फर्क सिर्फ इतना पड़ा कि जेब से निकलने वाला पैसा अब सीधे सरकारी खजाने में जा रहा है।
शराब खपत में रांची सबसे आगे
राजधानी रांची इस ‘शराब दौड़’ में सबसे आगे है। यहां के लोगों ने सबसे ज्यादा जाम छलकाए हैं। जमशेदपुर दूसरे, धनबाद तीसरे, बोकारो चौथे, हजारीबाग पांचवें और पलामू छठे स्थान पर है। हैरानी की बात यह है कि सूखे से जूझ रहा पलामू भी इस सूची में पीछे नहीं है—पानी की कमी हो सकती है, लेकिन शराब की नहीं।
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दुकानों की संख्या घटी, लेकिन खपत पर असर नहीं
सरकार ने शराब दुकानों की संख्या 1453 से घटाकर 1343 कर दी, लेकिन खपत पर कोई असर नहीं पड़ा। साफ है कि दुकानें कम हुईं, मगर ‘प्यास’ और लत जस की तस बनी हुई है।
न्यूनतम बिक्री नियम और सामाजिक सवाल
ऊपर से सरकार ने न्यूनतम बिक्री का ऐसा नियम बना दिया है कि चाहे बोतल बिके या नहीं, खजाना भरना तय है। यानी सिस्टम ऐसा तैयार किया गया है जिसमें नुकसान किसी का नहीं, सिवाय समाज के।