झारखंड उच्च न्यायालय में सिंहभूम जिले की रहने वाली 22 वर्षीय मुस्लिम इंजीनियर युवती ने याचिका दायर की है। युवती ने अपने परिजनों और धार्मिक संगठनों से जान-माल का खतरा बताते हुए अदालत से सुरक्षा और स्वतंत्र जीवन जीने के अधिकार की रक्षा करने की गुहार लगाई है।
परिजनों का विरोध और उत्पीड़न
याचिका के अनुसार युवती हिंदू युवक से प्रेम करती है। अंतर-धार्मिक संबंध की जानकारी मिलने पर परिजनों ने इसका तीखा विरोध किया। युवती के पिता ने उसे बेरहमी से पीटा और शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित करते हुए घर में बंद कर दिया। इसके साथ ही, परिजन और कुछ धार्मिक संगठन मिलकर उसकी जबरन दोगुनी उम्र के एक अशिक्षित व्यक्ति से शादी कराने का प्रयास कर रहे थे।
हॉस्टल में शरण और विवाह आवेदन
लगातार मिल रही धमकियों और उत्पीड़न से तंग आकर युवती ने अपना घर छोड़ दिया। उसने जमशेदपुर के काशीडीह स्थित ज्ञानदीप गर्ल्स पीजी हॉस्टल में शरण ली। घर से निकलने के पश्चात उसने विशेष विवाह अधिनियम के अंतर्गत शादी करने की कानूनी प्रक्रिया आरंभ की और 10 अक्तूबर को इसके लिए विधिवत आवेदन दिया।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से तत्काल सुरक्षा मांग
युवती का पक्ष है कि उसकी जन्मतिथि 21 दिसंबर, 2004 है। भारतीय संविधान के तहत बालिग होने के कारण उसे अपनी पसंद के अनुसार स्वतंत्र जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्राप्त है। हॉस्टल में रहने के दौरान उसे परिजनों या संबंधित संगठनों द्वारा जबरन उठा ले जाने का भय बना हुआ है। अपनी सुरक्षा पुख्ता करने के लिए युवती ने साकची थाना प्रभारी और पूर्वी सिंहभूम के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को पत्र व ईमेल भेजकर तत्काल सुरक्षा मांगी है, ताकि वह जमशेदपुर के संबंधित कार्यपालक मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर अपना बयान दर्ज करा सके।