सार
श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा ने राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार को ज्ञापन सौंपकर सम्मेद शिखर की धार्मिक पवित्रता, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने की मांग की। महासभा ने पर्यटन गतिविधियों पर रोक और श्रद्धालुओं की सुविधाएं बढ़ाने का आग्रह किया।
जैन महासभा ने की राज्यपाल से अपील
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श्री भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने राजभवन में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार से भेंट की। शिष्टमंडल ने राज्यपाल को एक ज्ञापन सौंपकर गिरिडीह जिले में स्थित जैन धर्म के पवित्र तीर्थ स्थल सम्मेद शिखर की धार्मिक पवित्रता, सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने की मांग उठाई। प्रतिनिधियों ने तीर्थराज के प्राकृतिक स्वरूप की रक्षा और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की निर्भीक वंदना के लिए राज्य सरकार तथा स्थानीय प्रशासन को आवश्यक निर्देश देने का आग्रह किया।
पवित्रता और सुरक्षा पर जोर
महासभा के प्रतिनिधियों ने ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से आग्रह किया कि सम्मेद शिखर पर्वतराज एवं संपूर्ण तीर्थ क्षेत्र में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। उन्होंने पर्वतराज के सभी मुख्य प्रवेश मार्गों पर सघन जांच और निगरानी प्रणाली स्थापित करने की बात कही। इसके साथ ही तीर्थयात्रियों की सुविधा के लिए क्षेत्र में स्वच्छता, शुद्ध पेयजल, त्वरित चिकित्सा सहायता और सुगम आवागमन की व्यवस्था उपलब्ध कराने की मांग रखी। शिष्टमंडल ने कहा कि प्रशासन को श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध करने चाहिए ताकि वे पूर्ण श्रद्धा भाव से अपनी यात्रा पूरी कर सकें।
सर्वोच्च धार्मिक आस्था का केंद्र
झारखंड के गिरिडीह जिले की पारसनाथ पहाड़ी पर स्थित सम्मेद शिखरजी जैन समुदाय का सर्वोच्च और सर्वाधिक पावन तीर्थ स्थल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जैन धर्म के 24 में से 20 तीर्थंकरों और अनगिनत सिद्धात्माओं ने इसी पावन पर्वतराज पर कठिन तपस्या के बाद मोक्ष प्राप्त किया है। यह क्षेत्र करोड़ों श्रद्धालुओं की आध्यात्मिक विरासत और अटूट आस्था का मुख्य केंद्र है। महासभा ने स्पष्ट किया कि इस पावन भूमि की गरिमा बनाए रखना संपूर्ण समाज के लिए अत्यंत संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय है।
असामाजिक गतिविधियों पर रोक की मांग
ज्ञापन में इस बात पर गहरा दुख व्यक्त किया गया कि तीर्थ क्षेत्र को पर्यटन स्थल या इको-टूरिज्म जोन के रूप में विकसित करने की कोशिशों से इसकी पवित्रता प्रभावित हो सकती है। समाज को अंदेशा है कि पर्यटन क्षेत्र बनने से वहां होटल, रिसॉर्ट, मांसाहारी भोजन और मदिरा की बिक्री बढ़ सकती है। इससे तीर्थ की सात्विक तथा अहिंसक परंपरा को नुकसान पहुंचेगा। जैन महासभा ने मांग की कि इस पूरे क्षेत्र को पर्यटन स्थल के बजाय केवल एक पवित्र धार्मिक स्थल के रूप में ही मान्यता दी जाए और सभी असामाजिक गतिविधियों पर कठोरता से रोक लगाई जाए।