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झारखंड: पाकुड़ में पैनम कोल कंपनी के अवैध खनन का मामला, 600 करोड़ की वित्तीय अनियमितता के मिले साक्ष्य

Wed, 28 Oct 2026 04:37 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

पाकुड़ में पैनम कोल कंपनी के अवैध खनन मामले में हाई कोर्ट ने एसीबी से 30 अक्तूबर तक शपथ पत्र मांगा है। प्रारंभिक जांच में 600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के साक्ष्य मिले हैं।

 

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झारखंड हाई कोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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पाकुड़ जिले में पैनम कोल कंपनी के अवैध खनन मामले में झारखंड हाई कोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) को अपना विस्तृत पक्ष 30 अक्तूबर तक शपथ पत्र के माध्यम से प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत में सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि जांच एजेंसी को अपनी शुरुआती पड़ताल में करीब 600 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता के ठोस साक्ष्य मिले हैं। इन साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी कंपनी और संबंधित पक्षों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की तैयारी कर रही है। हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 5 नवंबर को तय की है।

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जांच एजेंसी की प्रारंभिक पड़ताल
अदालत में सुनवाई के दौरान जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया कि अवैध खनन की जांच तेजी से चल रही है। जांच अधिकारियों ने बताया कि कोयला निष्कासन में बड़े पैमाने पर वित्तीय नियमों का उल्लंघन हुआ है, जिससे सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुंचा है। प्रारंभिक जांच में मिले 600 करोड़ रुपये की गड़बड़ी के सबूतों के आधार पर अब आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया जारी है। अदालत ने एजेंसी के तर्कों को सुनते हुए निर्देश दिया कि वे पूरी जांच रिपोर्ट को तथ्यवार शपथ पत्र के जरिये पीठ के समक्ष रखें ताकि आगे विधिक कदम उठाए जा सकें।

निदेशक की याचिका पर अदालत का निर्णय
सुनवाई के दौरान पैनम कोल कंपनी के निदेशक की ओर से आवेदन देकर स्वास्थ्य कारणों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग या प्रतिनिधि के माध्यम से बयान दर्ज कराने का अनुरोध किया गया था। अदालत ने इस आवेदन पर विचार करते हुए कहा कि वर्तमान चरण में निदेशक को जांच एजेंसी के समक्ष उपस्थित होने की आवश्यकता नहीं है। चूंकि जांच एजेंसी को वित्तीय गड़बड़ी के पर्याप्त साक्ष्य मिल चुके हैं और एजेंसी ने बयान दर्ज कराना अपरिहार्य नहीं माना है, इसलिए अदालत ने कंपनी निदेशक के आवेदन को निष्पादित कर दिया।
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पट्टा सीमा से अधिक निष्कासन का आरोप
यह पूरा मामला वर्ष 2015 में पाकुड़ और दुमका जिले में पैनम कोल माइंस कंपनी को आवंटित कोयला खनन पट्टे से जुड़ा है। प्रार्थी राम सुभग सिंह की जनहित याचिका के अनुसार कंपनी ने स्वीकृत लीज क्षेत्र से अधिक कोयले का अवैध खनन किया, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ। दुमका के प्रमंडल आयुक्त की 19 अक्तूबर, 2015 की रिपोर्ट पर राज्य सरकार द्वारा कार्रवाई न किए जाने से हाई कोर्ट असंतुष्ट था। इसके बाद अदालत ने मामले की प्रारंभिक जांच का जिम्मा भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को सौंपा था।

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