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Jharkhand Air Ambulance Crash: रांची से उड़ी जिंदगी की उड़ान सिमरिया के जंगल में खामोश, कैसे टूटा था संपर्क?

Tue, 24 Feb 2026 08:53 AM IST
प्रशांत तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

Jharkhand Air Ambulance Crash: रांची से दिल्ली जा रही एयर एंबुलेंस चतरा के सिमरिया जंगल में क्रैश हो गई। जिंदगी बचाने की इस जंग में मरीज संजय कुमार समेत सात लोगों की मौत हो गई। अभी तक मिली जानकारी के मुताबिक, यह हादसा  खराब मौसम और उड़ान के दौरान एटीसी से संपर्क टूटने के बाद हुआ। 
 
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झारखंड विमान हादसा - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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झारखंड की राजधानी रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एंबुलेंस सोमवार देर शाम दर्दनाक हादसे का शिकार हो गई। यह विमान चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र के जंगलों में क्रैश हो गया। विमान में मरीज समेत कुल सात लोग सवार थे और हादसे में सभी की मौत हो गई। चतरा के एसपी सुमित अग्रवाल ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि एयर एंबुलेंस सिमरिया के जंगल में गिरी है।

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भीषण आग में झुलस गए थे मरीज
मृतकों में 40 वर्षीय मरीज संजय कुमार भी शामिल हैं, जो कुछ दिन पहले एक ढाबे में लगी भीषण आग में गंभीर रूप से झुलस गए थे। इलेक्ट्रिक बर्न की वजह से उनका करीब 65 प्रतिशत शरीर जल गया था। उन्हें रांची के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां पिछले करीब दस दिनों से उनका इलाज चल रहा था। हालांकि, हालत में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर परिजनों ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने का निर्णय लिया।

जिंदगी बचाने की कोशिश बनी आखिरी उड़ान
संजय कुमार पेशे से ढाबा चलाते थे और अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए परिवार ने आर्थिक परेशानियों की परवाह किए बिना एयर एंबुलेंस की व्यवस्था की। रिश्तेदारों और परिचितों ने भी सहयोग किया ताकि उन्हें दिल्ली के बड़े अस्पताल में भर्ती कराया जा सके। एयर एंबुलेंस बुक होने के बाद परिवार में उम्मीद जगी कि राजधानी में बेहतर इलाज से उनकी जान बच जाएगी।
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जिंदगी की आखिरी उड़ान हुई साबित
संजय को एयर एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। उनके साथ उनकी पत्नी और अन्य परिजन भी सवार हुए। सभी के मन में उम्मीद और दुआ थी, लेकिन यह उड़ान उनकी जिंदगी की आखिरी उड़ान साबित हुई। दिल्ली पहुंचने से पहले ही विमान चतरा के सिमरिया जंगल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया और जीवन बचाने की यह कोशिश एक बड़ी त्रासदी में बदल गई। इस हादसे ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। जो संजय रोज अपने ढाबे पर लोगों को खाना खिलाते थे, वे अब नियति के आगे हार गए। बेहतर इलाज की उम्मीद में भरी यह उड़ान पल भर में मातम में बदल गई।

कैसे टूटा संपर्क?
जानकारी के अनुसार, विमान ने शाम 7:07 बजे रांची से उड़ान भरी थी और रात करीब 10 बजे दिल्ली पहुंचने का अनुमान था। उड़ान भरने के लगभग आधे घंटे बाद ही विमान क्रैश हो गया। विमान में एक मरीज, एक डॉक्टर, एक पैरामेडिक, दो सहायक, एक पायलट और एक सह-पायलट सवार थे।

विमान ने मांगी थी रास्ता बदलने की अनुमति
पायलट का नाम विवेक विकास भगत और सह-पायलट का नाम सौराजदीप सिंह बताया गया है। बताया जा रहा है कि उड़ान के दौरान खराब मौसम के कारण विमान ने रास्ता बदलने की अनुमति मांगी थी। कुछ समय तक एयर ट्रैफिक कंट्रोल (एटीसी) से संपर्क बना रहा, लेकिन बाद में अचानक संपर्क टूट गया। विमान न तो वाराणसी एटीसी से संपर्क कर पाया और न ही लखनऊ एटीसी से जुड़ सका। आखिरी बार इसका संपर्क कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से हुआ था। इसके बाद विमान से कोई संवाद स्थापित नहीं हो सका और रकुछ देर बाद सिमरिया के जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

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इनकी गई जान
इस भीषण हादसे में जिन लोगों की मौत हुई, उनमें मरीज संजय कुमार (40 वर्ष), उनकी पत्नी अर्चना देवी (35 वर्ष), भगीना ध्रुव कुमार (17 वर्ष), चिकित्सक डॉ. विकास कुमार गुप्ता, पारा मेडिकल कर्मी सचिन कुमार मिश्रा, पायलट विवेक विकास भगत और सह-पायलट सौराजदीप सिंह शामिल हैं।

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