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एनएमएल विकसित कर रहा तकनीक: जमशेदपुर में बनेगी पिनाका-ब्रह्मोस की मेटल केसिंग, बढ़ेगी आत्मनिर्भरता

Tue, 08 Sep 2026 05:35 PM IST
तरुणेंद्र कुमार चतुर्वेदी न्यूज डेस्क, अमर उजाला लातेहार/रांची

सार

जमशेदपुर के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में जल्द ही पिनाका और ब्रह्मोस जैसी मिसाइल प्रणालियों के लिए जरूरी मेटल कंपोनेंट और केसिंग तैयार किए जाएंगे।
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 एनएमएल जमशेदपुर। फाइल फोटो - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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जमशेदपुर के आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र में जल्द ही पिनाका और ब्रह्मोस जैसी मिसाइलों के लिए आवश्यक मेटल कंपोनेंट और केसिंग तैयार होंगे। सीएसआईआर-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (एनएमएल) इसकी तकनीक विकसित कर रही है। इससे रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और स्थानीय स्तर पर नए औद्योगिक अवसर पैदा होंगे।
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 एनएमएल के निदेशक डॉ. संदीप घोष चौधुरी ने बताया कि संस्थान रक्षा क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के साथ मिलकर नई तकनीकों का विकास कर रहा है।

मिसाइल केसिंग और उपकरणों का निर्माण
मिसाइल प्रणालियों में प्रयुक्त होने वाली केसिंग और अन्य संरचनात्मक हिस्सों के लिए साधारण स्टील या एल्युमिनियम का प्रयोग पर्याप्त नहीं होता। रक्षा उपकरणों के लिए धातुओं की रासायनिक संरचना, माइक्रोस्ट्रक्चर, मजबूती, कठोरता, ताप सहने की क्षमता और मशीनिंग व्यवहार को निर्धारित मानकों के अनुसार रखना आवश्यक है।
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जिंदल स्टेनलेस सहित आदित्यपुर की कई कंपनियों के साथ हुई चर्चा में यह बात सामने आई कि स्टील मिलने के बाद कई तरह की प्रोसेसिंग की जरूरत होती है। एनएमएल लैब स्केल पर ये तकनीकें विकसित करेगा और स्थानीय उद्योग अपने संयंत्रों में इनका बड़े पैमाने पर उत्पादन करेंगे। एनएमएल इस पूरी प्रक्रिया में तकनीकी साझेदार की भूमिका निभाएगा।

टंगस्टन निष्कर्षण से बढ़ी आत्मनिर्भरता
टंगस्टन जैसे महत्वपूर्ण तत्व भारत के अयस्कों में उपलब्ध नहीं हैं। एनएमएल ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की प्रायोजित परियोजना के तहत स्क्रैप से टंगस्टन निकालने की तकनीक विकसित की है। इस प्रक्रिया से भारी टंगस्टन एलॉय स्क्रैप और इस्तेमाल की गई टंगस्टन कार्बाइड टूल्स से 99.9 प्रतिशत से अधिक शुद्धता वाला येलो टंगस्टन ऑक्साइड और टंगस्टन मेटल पाउडर तैयार किया जाता है।

संस्थान के अनुसार इस प्रक्रिया में 95 प्रतिशत से अधिक रिकवरी हासिल की जाती है। एनएमएल ने यह तकनीक निजी उद्योगों को हस्तांतरित कर दी है। ये कंपनियां अब डीआरडीओ को टंगस्टन की आपूर्ति कर रही हैं, जिससे मिसाइलों और अन्य रक्षा उपकरणों का निर्माण संभव हो रहा है।

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 उत्पादन संबंधी चुनौतियों का नवाचार से समाधान
आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र अब केवल ऑटोमोबाइल और इंजीनियरिंग कंपोनेंट तक सीमित नहीं रहेगा। एनएमएल के प्रौद्योगिकी आउटरीच केंद्र में स्थानीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शामिल हैं। आदित्यपुर की कंपनियां उत्पादन संबंधी चुनौतियों को नवाचार से हल करने के लिए एनएमएल के साथ मिलकर काम कर रही हैं।
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इससे न केवल रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता सुदृढ़ होगी, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी। एनएमएल धातुओं की प्रोसेसिंग और फिनिशिंग में अत्यधिक सटीकता सुनिश्चित करने के लिए तकनीकी सहयोग प्रदान कर रहा है।
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