झारखंड की स्वास्थ्य व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में देर रात अचानक बिजली आपूर्ति ठप हो गई, जिससे पूरे अस्पताल परिसर में अंधेरा छा गया। बिजली कटने के कारण मरीजों, उनके परिजनों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल के कई हिस्सों में टॉर्च और मोबाइल फोन की रोशनी के सहारे इलाज करना पड़ा। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बिजली जाते ही अस्पताल के वार्डों और उपचार कक्षों में अंधेरा फैल गया। अचानक हुई इस स्थिति से मरीजों और उनके परिजनों के बीच अफरा-तफरी मच गई। स्वास्थ्यकर्मियों को भी इलाज और अन्य जरूरी कार्यों में दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
मोबाइल टॉर्च और इमरजेंसी लाइट के सहारे चला इलाज
बिजली आपूर्ति बाधित होने के बाद कई जगहों पर मरीजों का प्राथमिक उपचार मोबाइल फोन की टॉर्च और इमरजेंसी लाइट की मदद से किया गया। अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिजन पूरी रात मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर अपने परिजनों की देखभाल करते नजर आए। अस्पताल में भर्ती छोटे बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को इस स्थिति में सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। अंधेरे और बिजली संकट के कारण मरीजों के साथ-साथ उनके परिजनों की चिंता भी बढ़ गई।
बैकअप व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
घटना के बाद अस्पताल की आपातकालीन व्यवस्था और बैकअप बिजली प्रणाली को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि एक बड़े सरकारी अस्पताल में बिजली जाने के बाद यदि पर्याप्त बैकअप व्यवस्था काम नहीं करे, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने इस घटना को स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता बताया है। उनका कहना है कि जब जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की यह स्थिति है, तो ग्रामीण क्षेत्रों के स्वास्थ्य केंद्रों की हालत का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
सरकारी दावों पर उठे सवाल
सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के दावे लगातार किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जरूरी संसाधनों और व्यवस्थाओं की कमी अब भी बनी हुई है। उनका कहना है कि अस्पताल जैसे संवेदनशील संस्थान में बिजली बैकअप व्यवस्था का प्रभावी ढंग से काम नहीं करना गंभीर लापरवाही का मामला है। घटना के बाद अस्पताल प्रशासन और बिजली विभाग ने बिजली बाधित होने के कारणों की जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी खराबी के कारणों का पता लगाया जा रहा है और जल्द ही स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट किया जाएगा।
स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर छिड़ी बहस
इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन की तैयारियों, आपातकालीन व्यवस्था और जिले की स्वास्थ्य सेवाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा और उपचार के लिए मजबूत बैकअप सिस्टम होना बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने।