झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने हेमंत सोरेन सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि राज्य में सामने आया शराब घोटाला अब केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे सरकारी संरक्षण में दबाने का संगठित प्रयास किया जा रहा है।
'ऑडिट के लिए फाइलें उपलब्ध नहीं कराता विभाग'
मरांडी ने कहा कि महालेखाकार (एजी) की ऑडिट टीम जब घोटाले से जुड़े दस्तावेज़ों और फाइलों की मांग करती है, तो संबंधित विभाग टालमटोल और सीनाजोरी पर उतर आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सिर्फ आबकारी विभाग ही नहीं, बल्कि कई अन्य विभाग भी ऑडिट के लिए आवश्यक फाइलें उपलब्ध कराने से साफ इनकार कर रहे हैं।
'दोषियों को बचाने की हो रही कोशिश'
नेता प्रतिपक्ष ने बताया कि विभागों की ओर से यह दलील दी जा रही है कि फाइलें एसीबी (भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो) द्वारा ले जाई गई हैं। मरांडी ने इसे संदेहास्पद बताते हुए कहा कि एसीबी की यह कथित कार्रवाई दोषियों को पकड़ने के बजाय भ्रष्टाचार के सबूत छिपाने और दोषी अधिकारियों को बचाने का माध्यम बनती जा रही है।
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जनता की आंखों में धूल झोंक रहा सरकारी तंत्र
उन्होंने आरोप लगाया कि जांच के नाम पर फाइलों को ‘बंधक’ बना लेना एक सोची-समझी साजिश है, ताकि न तो ऑडिट पूरा हो सके और न ही सच्चाई जनता के सामने आ पाए। मरांडी ने कहा कि सरकारी तंत्र खुद जांच को बचाव की ढाल बनाकर जनता की आंखों में धूल झोंक रहा है। अंत में उन्होंने इसे झारखंड की जनता के साथ सबसे बड़ा विश्वासघात करार देते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।