दुमका जिले के महुआडंगाल इलाके में शुक्रवार को उस समय अफरातफरी मच गई, जब वन विभाग की एक टीम ने स्थानीय पुलिस के सहयोग से पंकज रावत के आवास पर छापेमारी कर सर्च अभियान चलाया। पंकज रावत को सांसद शिबू सोरेन के पूर्व आप्त सचिव विवेक रावत का भतीजा बताया जाता है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई की खबर फैलते ही पूरे इलाके में दिनभर चर्चाओं का दौर चलता रहा।
20 से 25 जवानों के साथ पहुंची टीम
छापेमारी का नेतृत्व प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी कर रहे थे। अभियान में वन विभाग के अधिकारियों के अलावा फॉरेस्ट गार्ड, महिला पुलिस बल तथा नगर और मुफस्सिल थाना की पुलिस भी शामिल थी। करीब 20 से 25 जवानों की मौजूदगी में टीम ने घर की तलाशी शुरू की। कार्रवाई के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी रखी गई।
सर्च वारंट को लेकर हुई नोकझोंक
सर्च अभियान शुरू होते ही स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करना शुरू कर दिया। इस दौरान जिला परिषद सदस्य और पंकज रावत की चाची चिंता देवी ने अधिकारियों से सर्च वारंट दिखाने की मांग की। इसे लेकर अधिकारियों और परिजनों के बीच कुछ समय तक तीखी नोकझोंक भी हुई। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि तलाशी की कार्रवाई पंकज रावत की मौजूदगी में निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जा रही है।
तलाशी के बाद परिजनों ने उठाई यह मांग
कई घंटे तक चली तलाशी के बाद जब टीम बाहर निकली तो परिजनों और स्थानीय लोगों ने अधिकारियों से लिखित रूप में यह प्रमाणित करने की मांग की कि घर की तलाशी के दौरान कोई भी आपत्तिजनक सामग्री बरामद नहीं हुई है। हालांकि, इस संबंध में अधिकारियों की ओर से कोई सार्वजनिक बयान नहीं दिया गया।
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कार्रवाई की वजह पर बना हुआ है सस्पेंस
वन विभाग और प्रशासन ने इस कार्रवाई के कारणों का अब तक खुलासा नहीं किया है। अधिकारियों ने इसे पूरी तरह गोपनीय और प्रक्रियागत कार्रवाई बताया है। वहीं, छापेमारी के पीछे की वजह को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं और अटकलें लगाई जा रही हैं। फिलहाल प्रशासन की ओर से मामले में कोई आधिकारिक जानकारी जारी नहीं की गई है।