रांची में उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा में फर्जीवाड़ा मामले में पकड़े गए 164 आरोपियों को सोमवार को सिविल कोर्ट में पेश किया गया। सभी आरोपियों को पांच बड़ी गाड़ियों में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कोर्ट परिसर लाया गया। एक साथ इतनी बड़ी संख्या में आरोपियों के पहुंचने से कोर्ट परिसर में असामान्य हलचल देखी गई और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुआ।
परिजनों और वकीलों की मौजूदगी
आरोपियों को कोर्ट लाए जाने के दौरान उनके परिजन और वकील भी मौके पर मौजूद रहे। गाड़ियों के आसपास परिजनों और अधिवक्ताओं की भीड़ देखी गई, जो पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए थे। इस दौरान माहौल तनावपूर्ण लेकिन नियंत्रित बना रहा।
बयान दर्ज करने की प्रक्रिया
मामले में सभी 164 आरोपियों का कोर्ट में बयान दर्ज किया जाना है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत प्रत्येक आरोपी से पूछताछ और बयान दर्ज करने की कार्रवाई की जाएगी, जिसके बाद आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
इधर, एक परिजन ने आरोप लगाया कि उनके बच्चे को गलत तरीके से फंसाया गया है। उनका कहना है कि जिन प्रश्न पत्रों के साथ आरोपियों को पकड़ा गया, उनका परीक्षा में आए सवालों से कोई मेल नहीं है और संबंधित अभ्यर्थी केवल परीक्षा की तैयारी कर रहे थे।
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कानूनी धाराएं और संभावित सजा
वहीं, एक अधिवक्ता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि आरोपियों पर धारा 111 और 112 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इन धाराओं के तहत कम से कम 10 साल की सजा का प्रावधान है। अधिवक्ता ने इसे संगठित अपराध की श्रेणी में रखते हुए कहा कि ऐसे मामलों में जमानत के लिए झारखंड हाईकोर्ट का रुख करना पड़ सकता है।
खबर लिखे जाने तक सभी आरोपी कोर्ट परिसर में ही गाड़ियों में मौजूद थे। जज के समक्ष बयान दर्ज होने के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेजे जाने की संभावना जताई जा रही है।