सार
झारखंड सरकार ने आपदा मुआवजा नीति में संशोधन कर गृह जिले से बाहर, दूसरे राज्य या विदेश में अधिसूचित आपदा से मृत्यु होने पर भी अनुग्रह अनुदान देने का प्रावधान किया है। भुगतान मूल गृह जिले के उपायुक्त करेंगे।
झारखंड सरकार ने आपदा मुआवजा नीति में संशोधन कर राज्य के निवासियों को बड़ी राहत दी है। नए प्रावधानों के तहत अधिसूचित आपदा में अपने मूल गृह जिले से बाहर मृत्यु होने पर भी मृतक के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान मिलेगा। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने इस संबंध में संकल्प जारी कर दिया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद विभाग की सचिव विप्रा भाल के हस्ताक्षर से निर्देश जारी किए गए हैं। यह व्यवस्था तत्काल प्रभाव से पूरे राज्य में लागू कर दी गई है। इसके तहत राज्य के किसी दूसरे जिले, देश के अन्य राज्य या विदेश में आपदा का शिकार होने वाले झारखंड के निवासियों के आश्रित भी सहायता के पात्र होंगे।
उपायुक्त करेंगे राशि का भुगतान
संशोधित व्यवस्था के तहत अनुग्रह अनुदान के भुगतान की जिम्मेदारी मृतक के मूल गृह जिले के प्रशासन की होगी। घटना स्थल के सक्षम अधिकारी के माध्यम से मामले का सत्यापन कराया जाएगा। सत्यापन के बाद मृत्यु प्रमाण पत्र, पोस्टमार्टम रिपोर्ट, प्राथमिकी और जांच रिपोर्ट सहित आवश्यक दस्तावेज जुटाए जाएंगे। सभी दस्तावेज प्राप्त होने के बाद संबंधित जिले के उपायुक्त मृतक के आश्रितों को अनुग्रह अनुदान की राशि जारी करेंगे। इससे राज्य से बाहर आपदा का शिकार होने वाले परिवारों को भी आर्थिक सहायता मिल सकेगी।
दोहरी सहायता लेने पर रोक
सरकार ने स्पष्ट किया है कि एक ही मृत्यु के मामले में दो अलग-अलग स्थानों से अनुग्रह अनुदान नहीं लिया जा सकेगा। दोहरे भुगतान को रोकने के लिए मृतक के आश्रितों से शपथ पत्र लिया जाएगा। इसमें उन्हें घोषणा करनी होगी कि किसी अन्य कार्यालय या संस्था से अनुग्रह अनुदान की राशि प्राप्त नहीं हुई है। गलत जानकारी देने या झूठा दावा करने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
बीमा और आपदा सूची के मानक
सरकार ने बीमा और अनुग्रह अनुदान को लेकर भी दिशा-निर्देश तय किए हैं। यदि मृतक के बीमा का प्रीमियम भारत सरकार या राज्य सरकार जमा करती थी, तो उसके आश्रितों को बीमा राशि और आपदा अनुग्रह अनुदान में से किसी एक का ही लाभ मिलेगा। वहीं, यदि मृतक स्वयं अपने बीमा का प्रीमियम भरता था, तो उसके आश्रित अनुग्रह अनुदान पाने के पात्र होंगे। नई नीति वज्रपात, अतिवृष्टि, सर्पदंश, खनन दुर्घटना, पानी में डूबने, भगदड़, गैस रिसाव, सड़क दुर्घटना, आंधी-तूफान और ग्रीष्म लहर जैसी प्राकृतिक एवं विशिष्ट स्थानीय आपदाओं पर लागू होगी।