हजारीबाग जिले में स्थित विनोबा भावे विश्वविद्यालय में शुक्रवार को आयोजित 11वें दीक्षांत समारोह में राज्यपाल सह झारखंड के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति संतोष कुमार गंगवार ने विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान कीं।
समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि विकसित भारत 2047 के संकल्प को पूरा करने में युवाओं की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होगी। देश का विकास केवल आर्थिक प्रगति से संभव नहीं है, बल्कि इसके लिए शिक्षित, कुशल, जिम्मेदार और संवेदनशील नागरिकों का योगदान भी जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने व्यक्तिगत लक्ष्यों को राष्ट्र की प्रगति से जोड़कर आगे बढ़ना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि डिग्री शिक्षा प्राप्त करने का प्रमाण है, लेकिन ज्ञान की वास्तविक सार्थकता उसके सामाजिक और राष्ट्रीय उपयोग में निहित है। विद्यार्थियों को निरंतर सीखने, अपनी क्षमताओं को निखारने और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को तैयार रखने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि आचार्य विनोबा भावे के नाम पर स्थापित इस विश्वविद्यालय के लिए उनके विचार और जीवन दर्शन प्रेरणास्रोत हैं। भूदान आंदोलन के माध्यम से विनोबा भावे ने मानवता, करुणा, सामाजिक सहयोग और न्याय का संदेश दिया। उनकी विचारधारा बताती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल व्यक्तिगत उन्नति नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास का लाभ पहुंचाना भी होना चाहिए।
राज्यपाल ने कहा कि भारत विज्ञान, तकनीक, अंतरिक्ष, डिजिटल सेवाओं, उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्टार्टअप इंडिया, इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहल युवाओं के लिए नए अवसर खोल रही हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से इन अवसरों का लाभ उठाकर नए विचारों को उद्यम का रूप देने की अपील की।
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झारखंड की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि प्राकृतिक संपदा, सांस्कृतिक विविधता और समृद्ध जनजातीय परंपराएं राज्य की ताकत हैं। विश्वविद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ शोध, नवाचार और नैतिक मूल्यों पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि युवा समाज और राष्ट्र के विकास में प्रभावी भूमिका निभा सकें।