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बिहार: 60% सालाना मुनाफे का झांसा देकर सीआरपीएफ जवानों से करोड़ों की ठगी, हवलदार और पत्नी समेत तीन पर केस

Wed, 14 Oct 2026 04:11 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

रांची के तिरिल सीआरपीएफ कैंप से जुड़े कथित निवेश घोटाले में 60 प्रतिशत सालाना मुनाफे का लालच देकर जवानों से करोड़ों रुपये लेने का आरोप है। पुलिस ने हवलदार, उसकी पत्नी और कंपनी के सीईओ समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

 

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आर्थिक अपराध। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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तिरिल स्थित केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) कैंप के जवानों को 60 प्रतिशत तक सालाना मुनाफा देने का लालच देकर करोड़ों रुपये की कथित ठगी करने का मामला सामने आया है। इस मामले में विधानसभा थाना पुलिस ने सीआरपीएफ के हवलदार योगेश चंद्र उरांव, उनकी शिक्षिका पत्नी पूनम कुमारी, कंपनी के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रोशन उरांव समेत अन्य सहयोगियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस वित्तीय लेन-देन, कथित धोखाधड़ी और मामले में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।

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60 प्रतिशत सालाना मुनाफे का दिया लालच
तिरिल सीआरपीएफ कैंप स्थित सीटीसी टी एंड आईटी (को-एड सीटीओ) के उप प्राचार्य बृजेश कुमार दुबे ने इस मामले में पुलिस से शिकायत की है। विभागीय जांच में सामने आया कि हवलदार योगेश चंद्र उरांव अपनी अलग-अलग स्थानों पर तैनाती के दौरान सुरक्षाकर्मियों को एक निजी निर्माण कंपनी में निवेश करने के लिए प्रेरित करता था। आरोप है कि वह अपने साथियों के साथ मिलकर मेसर्स रीपाकेल कंस्ट्रक्शन डेवलपमेंट प्राइवेट लिमिटेड में पैसे लगाने पर करीब 60 प्रतिशत सालाना मुनाफा देने का वादा करता था।

प्राथमिकी के अनुसार, रोशन उरांव कंपनी का संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी बताया गया है। आरोप है कि इस योजना के जरिए केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) और भारतीय सेना के जवानों से बड़ी रकम ली गई। जांच के दौरान कम से कम 14 ऐसे लोगों की जानकारी सामने आई है, जिनमें से प्रत्येक से कथित तौर पर 20 लाख से 25 लाख रुपये तक लिए गए। तिरिल कैंप के एक अन्य जवान से भी करीब 25 लाख रुपये लेने की बात सामने आई है।

कर्ज लेकर और भविष्य निधि से निकाली रकम
जांच रिपोर्ट के मुताबिक, तिरिल कैंप में 27 सितंबर को मृत पाए गए जवान भुवनेश्वर पाल भी कथित निवेश योजना में पैसे लगा चुके थे। उन्होंने 15 लाख रुपये का व्यक्तिगत ऋण लेकर पूरी रकम कंपनी के सीईओ रोशन उरांव के बैंक खाते में जमा कराई थी। इसके अलावा, उन्होंने अपनी भविष्य निधि से करीब 9.8 लाख रुपये निकाले थे। इसमें से नौ लाख रुपये हवलदार योगेश चंद्र उरांव की पत्नी पूनम कुमारी के बैंक खाते में स्थानांतरित किए गए थे।

रिपोर्ट में कहा गया है कि बड़ी रकम गंवाने के कारण भुवनेश्वर पाल मानसिक तनाव में थे। इसके बाद कैंप में उनकी मृत्यु हो गई। हालांकि, उनकी मृत्यु और कथित निवेश धोखाधड़ी के बीच संबंध की पुष्टि जांच के तथ्यों से ही हो सकेगी।

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वीआरएस का आवेदन खारिज, बिना अनुमति कैंप से निकला हवलदार
मामले की जानकारी सामने आने के बाद हवलदार योगेश चंद्र उरांव ने 30 सितंबर को सीआरपीएफ मुख्यालय में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) के लिए आवेदन दिया था। आवेदन में उसने अपनी पत्नी के शिक्षिका होने और खुद नौकरी जारी नहीं रखने की इच्छा का उल्लेख किया था। हालांकि, मामले में उसकी कथित संलिप्तता सामने आने के बाद अधिकारियों ने उसका वीआरएस आवेदन नामंजूर कर दिया।

इसके बाद आरोप है कि हवलदार तीन अक्टूबर को अपने मामा के भाई जीतवाहन उरांव के साथ बिना सूचना दिए कैंप से चला गया। शिकायत के मुताबिक, चार अक्टूबर से वह बिना अनुमति के लगातार अनुपस्थित है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामले की जांच जारी है। पुलिस संबंधित बैंक खातों, रकम के लेन-देन और कथित ठगी में शामिल अन्य सहयोगियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।

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