झारखंड के चर्चित उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा पेपर लीक मामले में जेल में बंद छह आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिली है। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने सभी छह आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था और बाद में आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने माना कि मामले में एक संगठित गिरोह सक्रिय था, जो अभ्यर्थियों से भारी रकम लेकर उन्हें परीक्षा में अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश कर रहा था।
इस मामले का खुलासा 11 अप्रैल 2026 की रात तमाड़ के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन में पुलिस की बड़ी छापेमारी के दौरान हुआ था। गुप्त सूचना के आधार पर पहुंची पुलिस टीम ने मौके से 166 लोगों को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तार लोगों में अभ्यर्थियों के अलावा पेपर लीक और सॉल्वर गैंग से जुड़े कई सदस्य शामिल थे। पुलिस के अनुसार गिरोह परीक्षा से पहले अभ्यर्थियों को संभावित प्रश्नों के उत्तर याद करवाता था।
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छापेमारी के दौरान मोबाइल फोन, दस्तावेज और अन्य संदिग्ध सामग्री भी बरामद की गई थी। जांच में सामने आया कि गिरोह अभ्यर्थियों से चयन सुनिश्चित कराने के नाम पर प्रति व्यक्ति लगभग 10 लाख रुपये तक वसूल रहा था। अभ्यर्थियों के मोबाइल और एडमिट कार्ड भी अपने कब्जे में रखे जाते थे। कुछ मामलों में भुगतान की गारंटी के लिए बैंक चेक तक लिए गए थे। पुलिस को संदेह है कि यह एक अंतरराज्यीय नेटवर्क है, जिसमें कई राज्यों के लोग शामिल हैं।
तमाड़ थाना में कांड संख्या 21/2026 के तहत दर्ज इस मामले में कुल 166 लोगों को आरोपी बनाया गया है। अब तक 161 आरोपियों को जमानत मिल चुकी है, जबकि मुख्य आरोपियों और गिरोह से जुड़े लोगों के खिलाफ जांच जारी है। अदालत का यह फैसला जांच एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता माना जा रहा है।