लातेहार जिले के महुआडांड़ प्रखंड के लखेपुर गांव में शनिवार को एक गंभीर लापरवाही सामने आई, जहां आंगनबाड़ी केंद्र पर ताला लटका मिला। केंद्र बंद रहने से छोटे-छोटे बच्चे बिना पोषण आहार के ही वापस लौट गए। वहीं गर्भवती और धात्री महिलाओं को भी जरूरी सेवाएं नहीं मिल सकीं।
बच्चों और महिलाओं को नहीं मिली निर्धारित सेवाएं
आंगनबाड़ी केंद्र बच्चों के पोषण, प्रारंभिक देखभाल और महिलाओं से जुड़ी कई आवश्यक सेवाओं का केंद्र माना जाता है। लेकिन केंद्र बंद मिलने से वहां पहुंचे बच्चों को बिना भोजन लौटना पड़ा। साथ ही गर्भवती और धात्री महिलाओं को भी निर्धारित सुविधाएं नहीं मिल सकीं।
ग्रामीणों ने जताई नाराजगी
ग्रामीणों का कहना है कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके अनुसार लंबे समय से सहिया, सेविका और सहायिका की मनमानी चल रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। शनिवार को जब लोग केंद्र पहुंचे, तो वहां सन्नाटा पसरा था और दरवाजे पर ताला लटका मिला। इस स्थिति से नाराज ग्रामीणों ने मौके पर ही विरोध जताया और जवाबदेही की मांग की।
पोषण आहार वितरण पर भी सवाल
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि केंद्र के माध्यम से मिलने वाले पोषण आहार का वितरण नियमित रूप से नहीं हो रहा है। उनका कहना है कि इसका सीधा असर बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। जब ग्रामीणों ने इस संबंध में सेविका और सहायिका से जवाब मांगा, तो वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे सकीं और चुप्पी साध ली।
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जांच और कार्रवाई का आश्वासन
मामले को लेकर पर्यवेक्षिका गोमती कुमारी ने जांच कर कार्रवाई का भरोसा दिया है। हालांकि ग्रामीणों का कहना है कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा। उनका कहना है कि जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।
सरकारी तंत्र की जमीनी हकीकत उजागर
यह घटना न सिर्फ स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि बच्चों और महिलाओं के पोषण व स्वास्थ्य से जुड़े सरकारी तंत्र की जमीनी हकीकत भी उजागर करती है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी है।