फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jharkhand: अंधविश्वास की भेंट चढ़ा मासूम, सर्पदंश के बाद 12 घंटे तक गोबर में दबाकर रखा; चली गई मासूम की जान

Mon, 29 Jun 2026 12:46 PM IST
राँची ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची

सार

हजारीबाग के रेमो करमा गांव में सांप के डसने के बाद 13 वर्षीय ऋषि कुमार को अस्पताल ले जाने के बजाय झाड़-फूंक और तंत्र-मंत्र का सहारा लिया गया। करीब 12 घंटे तक गोबर में दबाकर रखने के बाद उसकी मौत हो गई। घटना ने अंधविश्वास और स्वास्थ्य जागरूकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

विज्ञापन
सांकेतिक फोटो - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

झारखंड के हजारीबाग जिले के रेमो करमा गांव में अंधविश्वास ने एक 13 वर्षीय मासूम की जान ले ली। सर्पदंश के शिकार ऋषि कुमार की समय पर अस्पताल नहीं पहुंचने और वैज्ञानिक इलाज के बजाय झाड़-फूंक, तंत्र-मंत्र व जड़ी-बूटी के सहारे इलाज कराने के कारण मौत हो गई। इस घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में व्याप्त अंधविश्वास और स्वास्थ्य जागरूकता की कमी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन


जानकारी के अनुसार, अरविंद रविदास का पुत्र ऋषि कुमार रात में अपनी मां के साथ जमीन पर सो रहा था। देर रात उसने शरीर में किसी जहरीले जीव के काटने की शिकायत की। परिजनों को सांप के काटने की आशंका हुई, लेकिन उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय पहले एक स्थानीय झोलाछाप चिकित्सक के पास ले जाया गया। वहां सामान्य इंजेक्शन देकर बच्चे को घर भेज दिया गया। कुछ ही देर बाद उसकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

बच्चे को 12 घंटे तक गोबर के ढेर में दबाकर रखा गया
इसके बावजूद परिजन उसे अस्पताल नहीं ले गए। गांव के एक व्यक्ति ने तंत्र-मंत्र और जड़ी-बूटी से इलाज का दावा किया। अंधविश्वास के चलते बच्चे को करीब 12 घंटे तक गोबर के ढेर में दबाकर रखा गया। इस दौरान झाड़-फूंक का सिलसिला चलता रहा। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें लोग तमाशबीन बने दिखाई दे रहे हैं।
विज्ञापन


ये भी पढ़ें-  Jharkhand: झारखंड के आवासीय स्कूल में खाना खाने से सौ से अधिक छात्राएं बीमार, अस्पताल में मची अफरा-तफरी
विज्ञापन


गांव में शोक का माहौल
घंटों तक चले इस कथित उपचार के बाद रविवार सुबह ऋषि कुमार की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में शोक का माहौल है। चिकित्सकों का कहना है कि सर्पदंश का एकमात्र प्रभावी इलाज समय पर अस्पताल पहुंचकर एंटी-स्नेक वेनम लेना है। गोबर में दबाने या झाड़-फूंक जैसी प्रथाएं न केवल बेअसर हैं, बल्कि पीड़ित की जान के लिए और अधिक घातक साबित हो सकती हैं। यह घटना अंधविश्वास के खिलाफ जागरूकता बढ़ाने और ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करने की आवश्यकता को फिर से रेखांकित करती है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें