झारखंड में इन दिनों भाषा और संस्कृति को लेकर सियासी माहौल गर्म हो गया है। हाल ही में राज्य की विपक्षी पार्टी भाजपा ने सरकार पर आरोप लगाया कि झारखंड में उर्दू भाषा को अत्यधिक प्राथमिकता दी जा रही है। इस पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने करारा जवाब देते हुए कहा कि राज्य की सांस्कृतिक विविधता को बनाए रखना हमारी प्राथमिकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस तरह संस्कृत और संथाली की पढ़ाई हो रही है, उसी तरह उर्दू की पढ़ाई भी जारी रहेगी।
‘भाजपा को उर्दू से क्या दिक्कत?’
अपने संबोधन में मंत्री इरफान अंसारी ने भाजपा पर तंज कसा कि जब मुझे किसी और संस्कृति से कोई समस्या नहीं है, तो फिर भाजपा को उर्दू से क्या दिक्कत हो सकती है? उन्होंने यह भी जोड़ा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि प्रेम, भाईचारे और गंगा-जमुनी तहजीब की पहचान है। इसलिए इस भाषा की पढ़ाई पर कोई रोक नहीं लगेगी।
‘उर्दू पर सियासत बर्दाश्त नहीं’
भाजपा के आरोपों का जवाब देते हुए मंत्री अंसारी ने साफ किया कि उर्दू को किसी भी राजनीतिक एजेंडे की भेंट नहीं चढ़ने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि उर्दू सिर्फ मुस्लिम समाज की नहीं, बल्कि पूरे देश की साझा संस्कृति की धरोहर है। इस भाषा को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा करना दुर्भाग्यपूर्ण है।
जनसभा में गूंजीं तालियां
मंत्री के इस बयान के बाद जनसभा में मौजूद लोगों ने तालियों की गूंज से उनका समर्थन किया। उन्होंने कहा कि झारखंड की सरकार सभी भाषाओं और संस्कृतियों को समान रूप से महत्व देती है। अंसारी ने जोड़ा कि हमारी सरकार किसी भी भाषा या संस्कृति से भेदभाव नहीं करती। जो भाजपा इसे मुद्दा बना रही है, वह सिर्फ राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है।