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झारखंड में पहली बार चुंबन प्रतियोगिता, हिंदू जागरण मंच ने किया विरोध

Mon, 11 Dec 2017 03:09 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
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लिट्टीपाड़ा में आयोजित चुंबन प्रतियोगिता
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झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के वरिष्ठ नेता और लिट्टीपाड़ा से विधायक साइमन मरांडी ने 10 दिसंबर को आदिवासियों के मेले में एक चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन करवाया। लिट्टीपाड़ा में हर साल आयोजित होने वाले सिदो-कान्हू मेले में पहली बार आयोजित की गई इस चुंबन प्रतियोगिता में 18 शादीशुदा जोड़ों ने हिस्सा लिया और मेले में मौजूद हजारों की भीड़ के सामने अपने-अपने पति-पत्नियों को खुलेआम चूमा। इस प्रतियोगिता में सबसे अधिक समय तक एक दूसरे को चूमने वाले तीन जोड़ों को विधायक साइमन मरांडी ने इनाम दिया । 
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झारखंड के पाकुड़ जिले में लिट्टीपाड़ा में मनाए जानेवाले वार्षिक सिदो-कान्हू मेले में स्थानीय विधायक साइमन मरांडी और महेशपुर के विधायक प्रो. स्टीफन मरांडी की मौजूदगी में आयोजित यह चुंबन प्रतियोगिता मेले में काफी चर्चा का विषय रही। 

साइमन मरांडी ने चुंबन प्रतियोगिता आयोजन अपने पैतृक गांव तालपहाड़ी में लगने वाले डुमरिया मेले में कराया था। मरांडी के मुताबिक आदिवासी प्यार का इजहार करने में संकोची होते हैं, इसीलिए प्रेम और आधुनिकता को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने यह प्रतियोगिता करवाई।
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हालांकि इस आयोजन से विवाद भी खड़ा हुआ है। हिंदू जागरण मंच समेत भाजपा नेताओं ने इस चुंबन प्रतियोगिता की कड़ी निंदा की है। हिंदू जागरण मंच ने मुताबिक, 'सबसे पिछड़े प्रखंडों में शामिल लिट्टीपाड़ा में ऐसी चुंबन प्रतियोगिता आयोजित कराना इस क्षेत्र के पिछड़ेपन और सांस्कृति विरासत के साथ भद्दा मजाक है।' हिंदू जागरण मंच ने आयोजन का कड़ा विरोध किया और इसे ईसाई मिशनरियों की साजिश बताया है। मंच ने इसके खिलाफ उग्र आंदोलन करने का ऐलान किया है। 
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आदिवासी समाज में ऐसी कोई परंपरा नहीं है

लिट्टीपाड़ा में आयोजित चुंबन प्रतियोगिता
भाजपा विधायक साहेब हांसदा ने चुंबन प्रतियोगिता का आयोजन करने के लिए झामुमो विधायक की निंदा की है। उन्होंने कहा है कि आदिवासी समाज में सार्वजनिक तौर पर हाथ मिलाने या एक दूसरे का चुंबन लेने की कोई परंपरा नहीं है। हांसदा ने कहा कि यह युवा पीढ़ी को गलत राह दिखाने की शुरुआत है। 

झारखंड में अपने आप में पहली तरह के इस आयोजन पर वरिष्ठ पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता शिशिर टुडू ने कहा है कि आदिवासी समाज में ऐसी कोई परंपरा नहीं है। उन्होंने कहा कि समाज की मुख्यधारा में जो अल्ट्रा मॉर्डन संस्कृति विस्तार पा चुकी है ऐसे आयोजन उसी का असर है।

टुडू ने कहा कि आदिवासी समाज में प्रेम के लिए जगह है। उन्हें अपना जीवनसाथी ढूंढ़ने की आजादी है। टुडू ने यह मानने से इनकार किया कि प्यार के इजहार के लिए इस तरह का खुला प्रदर्शन आदिवासी समाज को स्वीकार्य होगा। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन भीड़ इकट्ठा करने के मकसद से कई गई घटना है जिसका कोई दूरगामी प्रभाव होगा। 
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