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नक्सली हमले में एसपी समेत छह शहीद

Tue, 02 Jul 2013 09:44 PM IST
रांची/नई दिल्ली/ब्यूरो/एजेंसी
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कानून के कसते शिकंजे से बौखलाए नक्सलियों ने मंगलवार को एक बार फिर हिंसक वारदात को अंजाम दिया। इस बार उन्होंने झारखंड के दुमका जिले में पुलिस की गाड़ियों पर घात लगाकर हमला किया।
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नक्सलियों ने पहले पुलिस वाहन को निशाना बनाकर बम विस्फोट किया और इसके बाद काफी देर तक अंधाधुंध फायरिंग करते रहे।

हमले में पाकुड़ के पुलिस अधीक्षक अमरजीत बलिहार समेत छह पुलिसकर्मी शहीद हो गए। हमले में तीन अन्य जवान घायल हो गए।

राज्य के गृह सचिव एनएन पांडे ने बताया कि हमले के समय 45 वर्षीय बलिहार दुमका में पुलिस उपमहानिरीक्षक प्रिया दूबे के साथ एक बैठक में शामिल होने के बाद दो वाहनों से अपनी टीम के साथ पाकुड़ लौट रहे थे।

रास्ते में दोपहर बाद 3:45 बजे पाकुड़ की सीमा से लगे दुमका जिले के काठीकुंड के निकट नक्सलियों ने पुलिस टीम पर घात लगाकर हमला किया।

हमले में एसपी, उनके चालक अशोक कुमार श्रीवास्तव और तीन सुरक्षा गार्डों चंदन कुमार थापा, राजेश कुमार शर्मा तथा मनोज कुमार हेंब्रम की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक जवान ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ दिया।
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अमरजीत बलिहार 2003 बैच के आईपीएस अधिकारी थे। वे झारखंड आर्म्ड पुलिस के कमांडेंट रह चुके थे। उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ काफी कड़े कदम उठाए थे। इसी वजह से पाकुड़ में पोस्टिंग के समय से ही वे नक्सलियों के निशाने पर थे।

डीआईजी प्रिया दुबे के अनुसार नक्सलियों से पुलिस टीम पर 150 राउंड से अधिक फायरिंग की, जिसकी वजह से उन्हें जवाबी कार्रवाई का मौका नहीं मिला। उन्होंने बताया कि नक्सलियों पुलिसकर्मियों के हथियार भी लूट ले गए।

दुमका जिले के उपायुक्त हर्ष मंगला ने बताया कि नक्सलियों की ओर से की गई फायरिंग में तीन पुलिसकर्मी घायल भी हुए हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। हमले की सूचना मिलते ही केंद्रीय अर्धसैनिक बल के 200 जवान मौके पर पहुंच गए। नक्सलियों की तलाश में इलाके में छापेमारी की जा रही है।

झारखंड के राज्यपाल सैयद अहमद ने पाकुड़ में पुलिस टीम पर हुए नक्सली हमले की निंदा की है। उन्होंने इस हमले को कायरतापूर्ण कार्य करार दिया है।

राज्यपाल ने कहा है कि पुलिस के इन बहादुर जवानों की शहादत जाया नहीं जाएगी। साथ ही उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हिंसा के लिए कोई जगह नहीं है। ऐसे में नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल हो जाना चाहिए।
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