झारखंड में जहां एक मां ने अपनी नवजात बच्ची को छोड़ दिया, वहीं तीन माएं उस बच्ची को लेने के लिये आग आ गईं। इतना ही नहीं दो परिवार तो बच्ची के लिए लड़ने तक लगे। बेटी के लिए नफरत के बाद ऐसा प्यार रांची के रिम्स में देखने को मिला।
रिम्स के इमरजेंसी वार्ड में एक महिला रविवार की सुबह अपनी डेढ़ साल की बच्ची को झालदा की लक्षी देवी को देकर वहां से भाग गई। लक्षी देवी अपने रिश्तेदार का इलाज कराने के लिए रिम्स आई थीं। उन्हें एक महिला ने यह कर अपनी बेटी पकड़ने के लिए कहा कि वह अभी दवाई लेकर आ जाएगी।
लक्षी देवी ने बेटी को रख लिया। इसके बाद करीब तीन घंटे तक इंतजार करने बाद जब बच्ची की मां नहीं आई तब उन्होंने इसकी सूचना रिम्स के सिक्यूरिटी एजेंसी को दी। घटना की सूचना मिलते ही वहां लोगों की भीड़ लग गयी। सभी लोग बच्ची की मां को कोस रहे थे और बच्ची लगातार रो रही थी।
तब दोपहर में फतेहपुर से आईं वकेश्वरी देवी ने बच्ची को लेने की इच्छा जाहिर की और कहा कि मैं इसकी मां हूं, इसे मैं पालूंगी। उन्होंने बच्ची को गोद में लिया, दूध मंगाया और पिलाने की कोशिश की। वहीं सिक्योरिटी कर्मी गीता देवी ने भी बच्ची को खिलाने और चुप किराने की कोशिश की। बच्ची उनकी गोद में आकर चुप हो गई।
इसके थोड़ी देर रिम्स के ट्रॉलीमैन दीपक राम की अपनी पत्नी चांदनी देवी आईं और उन्होंने बच्ची को अपना दूध पिलाया। मां का दूध पीकर बच्ची शांत हो गई। उनके पास पहले ही एक छोटी बच्ची थी। उन्होंने लावारिस छोड़ी गई बच्ची को गोद में लिया और कहा कि अब मेरी दो बेटियां हो गईं हैं। हालांकि कानूनी प्रक्रिया पूरी न होने के कारण बच्ची को बाद में बरियातू स्थित एनजीओ 'समाधान' में भेज दिया गया।